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2026-08-04

भोपाल में आयुष चिकित्सकों द्वारा एलोपैथिक दवाओं का अवैध प्रयोग

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

शहर की छोटी-बड़ी गलियों में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के डॉक्टर बिना किसी अधिकार के एलोपैथी की दवाएं लिख रहे हैं और मरीजों को इंजेक्शन तथा ग्लूकोज की बोतल तक लगा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग की अनदेखी से इन चिकित्सकों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता की जान जोखिम में है।

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कानूनन आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी लिखने की इजाजत नहीं है। एलोपैथी दवा लिखना, इंजेक्शन लगाना और सर्जरी करना पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद शहर में दर्जनों क्लिनिक इन नियमों को तोड़कर चल रहे हैं।

नवदुनिया की टीम ने शहर के तीन इलाकों में पड़ताल की, जिससे यह हकीकत सामने आई।

सुंदर नगर स्थित लाइफ लाइन क्लिनिक में डॉ. साजिद अहमद, जो बीएचएमएस (होम्योपैथी) डॉक्टर हैं, मौसमी बुखार, खांसी-जुकाम के मरीजों का इलाज करते हैं। उनकी क्लिनिक में तीन बेड लगे हैं, जहां मरीजों को सलाइन की बोतल चढ़ाई जाती है और मामूली सर्जरी भी की जाती है। यह सभी कार्य केवल एमबीबीएस डॉक्टर ही कर सकते हैं।

सेमरा कलां के विजय नगर में डॉ. अनीश अहमद रिलीफ हेल्थ क्लिनिक चलाते हैं। उनके पास यूनानी की डिग्री है और क्लिनिक में बीयू की कुछ अन्य डिग्रियां भी टंगी हैं। हालांकि, वे मरीजों को एलोपैथी की दवाएं दे रहे हैं। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इलाज कराने आते हैं और बिना किसी जांच-पड़ताल के महंगी अंग्रेजी दवाएं दी जा रही हैं।

अशोका गार्डन की सुभाष कॉलोनी में आदर्श क्लिनिक संचालित है, जहां डॉ. मुबीन खान और डॉ. सीमा खान बीयूएमएस डिग्री के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं। डॉ. सीमा खान खुद को स्त्री रोग विशेषज्ञ बताकर इलाज करती हैं, लेकिन क्लिनिक में इसका कोई विशेष प्रमाण पत्र नहीं मिला है। दोनों डॉक्टर मरीजों को सीधे एलोपैथी दवाएं दे रहे हैं।

भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि यह नियमों के खिलाफ है और ऐसे डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के लिए चार लोगों की एक टीम बनाई जा रही है।

यह टीम शहर की सभी संदिग्ध क्लिनिकों का निरीक्षण करेगी और जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी। डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि बिना जानकारी के एंटीबायोटिक और स्टेरायड देने से मरीजों में दवा का रिएक्शन, किडनी-लीवर खराब होने और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।