बुलंद सोच, भोपाल।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में फायर ब्रिगेड के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से साइबर ठग ने 81 हजार रुपये ठग लिए। आरोपित ने खुद को पीड़ित का करीबी रिश्तेदार बताया और अस्पताल में भर्ती होने की कहानी सुनाई। ठग ने अस्पताल का बिल जमा कराने के बहाने पीड़ित से कई किश्तों में क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान कराया।
जहांगीराबाद थाना पुलिस के अनुसार, 64 वर्षीय खालिद सिद्दीकी मुर्गी बाजार के पास रहते हैं। सोमवार शाम को मुर्गी बाजार चौराहे पर खड़े सिद्दीकी को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को उनका करीबी रिश्तेदार बताया और कहा कि वह अस्पताल में भर्ती है, जहां वह ऑनलाइन बिल का भुगतान नहीं कर पा रहा है।
ठग ने सिद्दीकी को भरोसा दिलाया कि वह पहले उनके खाते में रुपये भेज रहा है, जिसके बाद उनसे अपने यूपीआई के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने को कहा। रिश्तेदार समझकर खालिद उसकी बातों में आ गए और अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 81 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कुछ देर बाद जब उन्होंने अपना बैंक बैलेंस देखा, तो पता चला कि उनके खाते में कोई रकम आई ही नहीं थी। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। शिकायत के आधार पर जहांगीराबाद थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।
फर्जी लोन ऐप से ठगी
बजरिया थाना क्षेत्र में एक युवती से आसान लोन का झांसा देकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 28,900 रुपये ठग लिए गए। इस दौरान संदिग्ध ट्रांजेक्शन को लेकर बैंक ने कई बार भुगतान के संबंध में चेतावनी भी दी थी, लेकिन युवती ने उसे नजरअंदाज कर रकम ट्रांसफर करती रही। बाद में जब न तो लोन मिला और न ही ठगों से संपर्क हो पाया, तब उसे साइबर ठगी का एहसास हुआ।
बजरिया थाना पुलिस के अनुसार, 22 वर्षीय हर्षिता ठाकुर क्षेत्र की निवासी हैं और एक ज्वेलरी शोरूम में कार्यरत हैं। हर्षिता गोल्ड में निवेश करने के उद्देश्य से ऑनलाइन लोन लेना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने एक लोन ऐप के माध्यम से आवेदन किया था।
कुछ ही देर बाद खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले लोगों ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने लोन स्वीकृत कराने के नाम पर अलग-अलग चरणों में प्रोसेसिंग फीस, वेरिफिकेशन चार्ज और अन्य शुल्क जमा कराने को कहा। रकम ट्रांसफर करते समय बैंक की ओर से ट्रांजेक्शन को संदिग्ध बताते हुए चेतावनी भी दी गई।
इस पर बैंक कर्मियों ने भुगतान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी, लेकिन युवती ने जवाब दिया कि वह लोन की प्रक्रिया पूरी कर रही है। इसके बाद उन्होंने कई किश्तों में कुल 28,900 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब लोन की राशि खाते में नहीं आई और ठगों ने संपर्क बंद कर दिया, तब पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई। बजरिया पुलिस ने साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिना OTP खाते से पैसे निकाले
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने बिना ओटीपी या संदिग्ध लिंक का सहारा लिए एक बुजुर्ग के बैंक खाते से 35 हजार रुपये निकाल लिए। अहीर मोहल्ला निवासी 72 वर्षीय हरिशंकर गुप्ता के बैंक खाते से यह राशि निकाली गई।
उन्हें ठगी का पता तब चला, जब मोबाइल पर बैंक से राशि कटने का संदेश मिला। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने न किसी को ओटीपी बताया और न ही किसी लिंक पर क्लिक किया। शिकायत पर पुलिस ने साइबर ठगी का मामला दर्ज कर बैंक ट्रांजेक्शन और खाते की जानकारी के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
