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2026-08-10

भोपाल में ई-बस ड्राइवर AI टेस्ट पास कर ‘कोच कैप्टन’ बने

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

सिटी बसों में यात्रियों और ड्राइवर-कंडक्टर के बीच होने वाली नोकझोंक को पीएम ई-बस सेवा के साथ बदलने का प्रयास शुरू हो गया है।

अब बस का ड्राइवर केवल वाहन नहीं चलाएगा, बल्कि ‘कोच कैप्टन’ कहलाएगा और कंडक्टर को ‘डिजिटल असिस्टेंट’ के रूप में पहचान मिलेगी, साथ ही उन्हें व्यवहार कुशलता का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

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सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्टीयरिंग संभालने से पहले ड्राइवरों को एआई आधारित ड्राइविंग सिम्युलेटर की परीक्षा पास करनी पड़ रही है।

राजधानी भोपाल में फिलहाल 20 ई-बसें चल रही हैं, जिनके लिए भर्ती किए गए कोच कैप्टन और डिजिटल असिस्टेंट को सड़क पर उतारने से पहले कई चरणों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

आवेदन की स्क्रीनिंग, मेडिकल जांच, फिजिकल फिटनेस और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद शुरू हुई ट्रेनिंग में सिर्फ ड्राइविंग नहीं, बल्कि व्यवहार भी परीक्षा का हिस्सा बना; तय मानकों पर खरे न उतरने वाले कई अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के दौरान बाहर कर दिया गया।

ड्राइवरों को सिम्युलेटर पर ऐसी परिस्थितियों में बस चलानी पड़ी, जो रोजमर्रा की सड़क पर कभी भी सामने आ सकती हैं, जिसमें कोहरा, बारिश, अचानक सामने आया वाहन, ब्रेक फेल, भीड़भाड़ वाला चौराहा और रात का ट्रैफिक जैसी हर स्थिति में उनके फैसले और प्रतिक्रिया का आकलन किया गया।

इस अभ्यास में बस को ऊर्जा दक्ष तरीके से चलाने, बैटरी बचाने और अचानक ब्रेक से बचने का भी प्रशिक्षण दिया गया।

बीसीएलएल ने पहली बार ड्राइवर और कंडक्टर के व्यवहार को भी ट्रेनिंग का अहम हिस्सा बनाया, जिसमें उन्हें हर यात्री का अभिवादन करने, बुजुर्ग, दिव्यांग और महिलाओं की मदद करने, तथा गुस्से में आए यात्री से बहस के बजाय संवाद करने का तरीका सिखाया गया।

डिजिटल असिस्टेंट को इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन, ऑनलाइन भुगतान, फायर सेफ्टी, प्राथमिक उपचार और आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकालने का भी प्रशिक्षण दिया गया।

अधिकारियों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बसों की संख्या नहीं, बल्कि सेवा का अनुभव है, और यदि चालक सुरक्षित ड्राइविंग करे, डिजिटल असिस्टेंट सम्मानजनक व्यवहार करे तथा बस समय पर पहुंचे, तभी लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे।

बीसीएलएल की सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि ई-बस सेवा में यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सम्मानजनक व्यवहार उनकी प्राथमिकता है, इसी उद्देश्य से कोच कैप्टन और डिजिटल असिस्टेंट को एआई आधारित सिम्युलेटर, सुरक्षित ड्राइविंग, डिजिटल टिकटिंग और यात्री व्यवहार का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उन्हें बेहतर सार्वजनिक परिवहन अनुभव मिल सके।