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2026-08-14

भोपाल के जेपी अस्पताल में बारिश के बाद कई वार्डों और सेंटरों में पानी भरा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल के जिला अस्पताल जेपी में मंगलवार शाम करीब सात बजे हुई वर्षा के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। अस्पताल के कई हिस्सों में छत से पानी टपकता हुआ पाया गया।

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मरीजों के बैठने की जगहों पर पानी जमा हो गया, जिससे दस्तावेज और फर्नीचर भी भीग गए। सी ब्लॉक की पहली मंजिल पर स्थित आईसीयू के पास छत से लगातार पानी टपक रहा था, जिसे रोकने के लिए नीचे बाल्टी रखनी पड़ी।

अस्पताल के सी ब्लॉक की सीढ़ियों में भी पानी जमा हो गया था। इन सीढ़ियों का उपयोग मरीज, उनके स्वजन और स्टाफ लगातार आवाजाही के लिए करते हैं। गीली सीढ़ियों के कारण फिसलने का खतरा बना रहा, जो बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक स्थिति थी।

मरीजों और उनके परिजनों के बैठने के लिए बनाई गई जगहों पर भी पानी जमा रहा। कई स्थानों पर लोगों को पानी से बचकर बैठने की जगह तलाशनी पड़ी। ए ब्लॉक की पहली मंजिल पर भी छत से पानी टपकता मिला, जहां रखी लकड़ी की कुर्सी और बेंच पर पानी जमा था।

जेपी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड जैसी महत्वपूर्ण जगह भी पानी से प्रभावित रही, जहां छत से पानी टपकता रहा। इमरजेंसी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। मरीजों ने बताया कि वर्षा के दौरान अक्सर ऐसी ही स्थिति बन जाती है।

महिला वार्ड के अंदर भी पानी जमा हो गया, जिससे भर्ती मरीजों और उनके स्वजनों को पानी के बीच से होकर आवाजाही करनी पड़ी। अस्पताल परिसर में स्थित पुलिस चौकी में भी पानी भर गया था, और हीमोफिलिया वार्ड के बाहर भी पानी जमा रहा।

सोनोग्राफी सेंटर और उसके पंजीयन केंद्र में भी पानी भर गया। पंजीयन केंद्र में रखे कई दस्तावेज पानी से गीले हो गए। मरीजों के महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखने वाली जगह पर पानी पहुंचने से कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार शाम को अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में वर्षा का पानी टपकता हुआ देखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि छत और भवन की जल निकासी व्यवस्था में समस्या बनी हुई है।

मरीजों को एक ओर उपचार के लिए अस्पताल आना पड़ रहा था, वहीं दूसरी ओर उन्हें पानी, फिसलन और गीली जगहों से होकर गुजरना पड़ा। वर्षा के दौरान ऐसी स्थिति मरीजों और उनके स्वजनों के लिए असुविधा के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ाती है।