बुलंद सोच, भोपाल।

प्रदेश में कंप्यूटर प्रवीणता एवं प्रमाणन परीक्षा (सीपीसीटी) की अनिवार्यता के कारण हजारों पात्र कर्मचारियों की पदोन्नतियां रोक दी गई थीं। कृषि और उद्योग विभाग ने कई मामलों में पदोन्नति आदेश निरस्त कर कर्मचारियों को दोबारा चतुर्थ श्रेणी के पद पर भेज दिया था।
इस स्थिति से कर्मचारियों में असंतोष पनपा था, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से व्यवस्था में परिवर्तन करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा के आधार पर पदोन्नति से वंचित या रिवर्ट नहीं करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।
प्रदेश में पदोन्नति नियम-2025 के आधार पर जून 2026 में विभिन्न विभागों ने पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की थी। कई विभागों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दो वर्ष की परिवीक्षा पर सहायक ग्रेड तीन के पद पर पदोन्नत किया था। इसी बीच, 22 जुलाई को उच्च शिक्षा विभाग ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन द्वारा की गई पदोन्नति को लेकर मार्गदर्शन मांगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्टीकरण दिया कि सीपीसीटी अनिवार्य है, जिसके बाद कृषि और उद्योग विभाग ने जारी पदोन्नति आदेश निरस्त कर कर्मचारियों को उनके पुराने पदों पर कार्य करने के निर्देश दे दिए।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ और मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ का मत था कि सीपीसीटी की अनिवार्यता सीधी भर्ती के लिए लागू की गई थी, और इसे पदोन्नति का आधार बनाना उचित नहीं है। उनका कहना था कि अनुकंपा नियुक्ति या चतुर्थ श्रेणी में नियुक्त कर्मचारी वर्षों बाद पदोन्नति के पात्र बनते हैं, ऐसे में सीपीसीटी की शर्त और प्रमाण-पत्र की सात वर्ष की वैधता उन्हें पदोन्नति से वंचित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को आदेश जारी कर कहा कि पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता पर जल्द सकारात्मक दृष्टिकोण से निर्णय लिया जाए, ताकि सभी पात्र कर्मचारियों को लाभ मिल सके। अब सामान्य प्रशासन विभाग इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करेगा।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को कर्मचारी हितैषी और एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने दावा किया कि इस निर्णय से छह से सात हजार कर्मचारी लाभान्वित होंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों की पदोन्नतियां निरस्त की गई थीं, उन आदेशों को वापस ले लिया जाएगा।
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