बुलंद सोच, भोपाल।
कलियासोत बांध के 13 शटर के पास पहाड़ी स्थित एक फार्महाउस के समीप सड़क पार करते बाघ का वायरल वीडियो पुराना बताया जा रहा है।
डिप्टी रेंजर राधेश्याम हरियाले ने जानकारी दी कि वन विभाग ने मौके का निरीक्षण किया है और फिलहाल उस क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
उनके अनुसार, यह वीडियो लगभग 10 से 15 दिन पुराना हो सकता है, जब इस इलाके में बाघ का आवागमन था।
बाघ मित्र राशिद नूर ने भी इस वीडियो को पुराना बताया है और कहा कि उन्होंने दिन में मौके का निरीक्षण किया था।
नूर ने स्पष्ट किया कि कलियासोत, केरवा, समरधा और आसपास के जंगल बाघों के प्राकृतिक आवास हैं, इसलिए यहां बाघों का आना-जाना सामान्य है।
उन्होंने लोगों से जंगल और डैम क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने तथा अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की।
भोपाल के आसपास लगभग 25 किलोमीटर के दायरे में बाघों की नियमित गतिविधि दर्ज होती रहती है।
रानी दुर्गावती अभयारण्य में बाघिन का उपचार
रानी दुर्गावती अभयारण्य में एक घायल और भूखी बाघिन मिली, जिसे उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया है।
कलारा क्षेत्र में तेंदुए का आतंक
ग्राम कलारा वन क्षेत्र में पिछले दो सप्ताह से तेंदुए की लगातार हलचल से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
गुनगा-कलारा और उनीदा-कलारा मार्ग पर कई लोगों ने तेंदुआ देखने का दावा किया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद वन विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।
सरपंच देवकरण कुशवाह और जनपद सदस्य प्रतिनिधि घनश्याम शर्मा ने क्षेत्र में सघन कॉम्बिंग अभियान, नियमित गश्त और आवश्यकता पड़ने पर तेंदुए के सुरक्षित रेस्क्यू की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जन-धन की हानि हो सकती है।
