बुलंद सोच, सतना।
सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय में 12 दिन तक मौत से जंग लड़ने के बाद सर्पदंश का शिकार हुए चचेरे भाई-बहन पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गए।
अस्पताल परिसर में उनके स्वस्थ होने पर डॉक्टरों की टीम और स्टाफ ने केक काटकर उन्हें विदाई दी, जिससे वहां भावुक और खुशी से भरा नजारा देखने को मिला।
अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, रैगांव विधानसभा क्षेत्र के करसरा गांव निवासी 11 वर्षीय आंचल और उसके 8 वर्षीय चचेरे भाई अनुराग को घर में सोते समय जहरीले सांप ने डस लिया था।
हालत बिगड़ने पर परिजन दोनों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उन्हें गंभीर अवस्था में भर्ती कर आईसीयू में इलाज शुरू किया गया।
दोनों बच्चों की हालत बेहद नाजुक थी।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप द्विवेदी के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
करीब पांच दिनों तक दोनों बच्चे वेंटिलेटर पर रहे और डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी और इलाज से उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।
डॉक्टर द्विवेदी ने बताया कि बच्चों के माता-पिता सर्प के काटने के करीब दस से बारह घंटे बाद जिला अस्पताल पहुंचे थे।
उस समय दोनों के फेफड़े (लंग्स) जाम हो चुके थे।
करीब 12 दिनों के उपचार के बाद दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो गए और सकुशल अपने घर वापस जा सके।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ ने बच्चों के साथ केक काटकर उनकी नई जिंदगी का जश्न मनाया, जिससे परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
अस्पताल प्रबंधन ने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की घटना होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं, बल्कि तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
