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2026-07-25

इंदौर में छात्र आंदोलन पर पुलिस की सख्ती बढ़ी, भोजन-पानी देने वालों से पूछताछ

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर स्थित भंवरकुआं चौराहे पर दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों पर अब पुलिस की सख्ती बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों तक भोजन और पानी पहुंचाने वाले युवकों को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि छात्रों के इस शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास न किया जाए।

कांग्रेस नेताओं का छात्रों से संवाद

बुधवार रात पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भंवरकुआं चौराहे पर चल रहे धरना स्थल पहुंचे थे। नेताओं ने वहां लगभग 30 मिनट रुककर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से सीधे चर्चा की। बातचीत के दौरान विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है। छात्रों ने बताया कि प्रशासनिक निर्देशों के तहत उनके लिए भोजन, पानी और चाय की व्यवस्था करने वाले सहयोगियों को पुलिस थानों में बुलाकर परेशान किया जा रहा है।

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कांग्रेस की चेतावनी और मांगों का समर्थन

छात्रों से जानकारी मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भंवरकुआं चौराहे पर छात्र पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन उनके साथ किसी प्रकार की ज्यादती या आंदोलन को कुचलने का प्रयास करेगा, तो कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा का पेपर लीक होने की स्थिति में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराया। दिग्विजय सिंह ने टेंट लगाने की अनुमति न दिए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि बारिश के समय विद्यार्थियों को फ्लाई-ओवर पुल के नीचे बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से छात्रों के साथ मानवीय व्यवहार करने का आग्रह किया।

प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या

भंवरकुआं चौराहे पर रात के समय आंदोलनकारी विद्यार्थियों की संख्या में बड़ी वृद्धि देखी जा रही है। कोचिंग संस्थानों से छूटने के बाद छात्र घर या हॉस्टल लौटने के बजाय सीधे आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे हैं।