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2026-08-07

भोपाल से संचालित म्यूल बैंक खातों का बड़ा नेटवर्क उजागर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

हमीदिया अस्पताल की एक डॉक्टर से ऑनलाइन गेमिंग लिंक के माध्यम से हुई साइबर ठगी की जांच के दौरान पुलिस के सामने साइबर अपराध का एक बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है।

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रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ में यह जानकारी मिली है कि भोपाल में बैठकर सैकड़ों ग्रामीणों के बैंक खाते खुलवाए जाते थे और उन्हें साइबर ठगों को किराए पर उपलब्ध कराया जाता था। इन खातों का उपयोग देशभर में ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

इस गिरोह द्वारा प्रत्येक ट्रांजेक्शन पर कुल छह प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था। इसमें से तीन प्रतिशत रकम खाताधारकों और स्थानीय नेटवर्क के लिए होती थी, जबकि शेष तीन प्रतिशत मुख्य एजेंट अपने पास रखता था।

कोहेफिजा थाना पुलिस ने इस मामले में राजगढ़ जिले के ब्यावरा निवासी करतार सिंह को मंगलवार को गिरफ्तार किया है। करतार सिंह वर्तमान में भोपाल के इंद्रपुरी इलाके में रह रहा था और यहीं से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, करतार सिंह ने राजस्थान में सक्रिय साइबर ठगों से सीधा संपर्क स्थापित कर रखा था और उनके लिए म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था करता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान के जालसाज देशभर में साइबर ठगी करने के बाद रकम सीधे भोपाल के इन बैंक खातों में डलवाते थे। इसके बाद गिरोह के एजेंट महेश बिश्नोई और विकास पुनिया भोपाल आते थे, खाताधारकों से नकदी निकलवाते थे और पूरी रकम इकट्ठा कर राजस्थान ले जाते थे। रकम का कुछ हिस्सा कैश डिपाजिट मशीन (सीडीएम) के माध्यम से भी सरगना तक पहुंचाया जाता था।

पुलिस ने इससे पहले जोधपुर निवासी महेश बिश्नोई, जो एक बी-फार्मा का छात्र है, और विकास पुनिया को गिरफ्तार किया था। करतार सिंह तक पुलिस इन दोनों की निशानदेही पर ही पहुंची।

टेलीग्राम जॉब ऑफर के नाम पर 7.78 लाख रुपये की ठगी भी हुई थी, जिसमें ठगों ने दोस्तों और परिजनों के खातों से रुपये ट्रांसफर कराए थे।

करतार सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके कब्जे से 10 बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में इसे केवल नेटवर्क का एक हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने भोपाल और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों के नाम पर सैकड़ों बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कई ग्रामीणों को खाते खुलवाने के बदले मामूली रकम का लालच दिया जाता था।

पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय से रिमांड पर लिया है। अब उनके मोबाइल फोन, बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि भोपाल में म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने के इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी।