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2026-08-10

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भोपाल में 80 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण राज्य सरकार दुविधा में है। सुप्रीम कोर्ट ने नियम विरुद्ध चल रही सभी व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने का आदेश दिया है।
भोपाल में इस आदेश के दायरे में लगभग 60 से 80 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान आते हैं। यदि इन पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह अदालत की अवमानना होगी।
वहीं, इन प्रतिष्ठानों को बंद करने से लगभग 5 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में, नए मास्टर प्लान में इसका व्यावहारिक समाधान तलाशने पर मंथन चल रहा है।

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व्यावसायिक संपत्तियों की स्थिति

भोपाल में एक लाख से अधिक व्यावसायिक संपत्तियां हैं। इनमें से 60 से 80 हजार में भू-उपयोग, भवन अनुमति या अन्य नियमों के उल्लंघन का अनुमान है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, नर्मदापुरम रोड पर लगभग 2,500 और कोलार रोड पर लगभग 2,000 व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत सर्वे होने पर वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
कोलार रोड की एक तस्वीर में आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित दिख रही हैं, जहां सड़क गाड़ियों से पटी है और बड़ी-बड़ी इमारतें हैं। निगम का दावा है कि यहां ऐसी 2,000 संपत्तियां हैं।

मास्टर प्लान की आवश्यकता और नए प्रावधान

भोपाल का लागू मास्टर प्लान 1995 में बना था और इसकी अवधि 2005 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद शहर की आबादी, सीमाएं और कारोबारी जरूरतें तेजी से बढ़ीं, लेकिन भूमि उपयोग में बदलाव नहीं हुआ।
नतीजतन, नर्मदापुरम रोड और कोलार रोड जैसी प्रमुख सड़कें बाजार बन गईं, जबकि रिकॉर्ड में उनका मूल भू-उपयोग नहीं बदला। शहर 31 साल से बिना उचित नियोजन के बढ़ रहा है।
भोपाल के नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और शासन स्तर पर इसकी समीक्षा चल रही है। चर्चा इस बात पर है कि वर्षों में बाजार का रूप ले चुकी प्रमुख सड़कों के लिए व्यावहारिक प्रावधान किए जाएं।
टाउन प्लानिंग विभाग सड़क की चौड़ाई, पार्किंग, ट्रैफिक और क्षेत्र के स्वरूप के आधार पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग के प्रावधानों पर विचार कर रहा है।
अस्पताल, स्कूल, बस टर्मिनस और मेट्रो स्टेशन जैसे बड़े संस्थानों के आसपास विकसित होने वाली सहायक व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्लानिंग में शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए दूसरे राज्यों के नियमों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
नए मास्टर प्लान में प्रमुख सड़कों के लिए अलग प्रावधान होंगे। 18 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर पर्याप्त पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं की शर्तों के साथ नियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों की मंजूरी दी जा सकती है।
इससे नर्मदापुरम रोड और कोलार रोड जैसे पहले से विकसित बाजारों को व्यावहारिक समाधान मिल सकता है।
सरकार सभी रहवासी क्षेत्रों को व्यावसायिक घोषित करने के पक्ष में नहीं है। अरेरा कॉलोनी जैसी नियोजित लो-डेंसिटी कॉलोनियों में बड़े अस्पताल, होटल और शोरूम नियमित करने से ट्रैफिक और नागरिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
प्रमुख सड़कों पर विकसित बाजार और शांत रहवासी इलाकों के लिए अलग प्रावधान किए जाएंगे, ताकि समाधान की आड़ में पूरा शहर ही बाजार न बन जाए।