बुलंद सोच, उज्जैन।
उज्जैन में चिंतामन-नईखेड़ी के बीच डाली जा रही नई रेल लाइन परियोजना ग्रामीणों के आरोपों के बाद विवादों में घिर गई है। एसडीएम न्यायालय में इस मामले पर आधे घंटे बहस हुई।
ग्रामीणों के पक्ष में उतरे हाईकोर्ट एडवोकेट ने किसानों की जमीन से बगैर सूचना दिए अलाइनमेंट निकालने और सर्वे करने पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने यह भी पूछा कि तीनों अलाइनमेंट में से ज्यादा दूरी वाले और अधिक किसानों को प्रभावित करने वाले अलाइनमेंट को अंतिम रूप क्यों दिया गया।
मौके पर मौजूद रेलवे अधिकारी इन सवालों का जवाब देने में हिचकिचाते दिखाई दिए। न्यायालय में तीनों अलाइनमेंट पेश किए गए, जिन पर विस्तृत बहस हुई। एसडीएम कृतिका भीमावद ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद रेलवे अफसरों से स्पष्ट दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए।
न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है। यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो इस परियोजना का काम शुरू होने में देरी हो सकती है।
मंगरोला के जीतसिंह फौजी ने आरोप लगाया कि रेलवे अफसरों ने अलाइनमेंट बदलने के लिए उनसे रिश्वत की मांग की थी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई आगे तक लड़ी जाएगी।
परियोजना का विवरण
सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन रेलवे स्टेशन पर ट्रैफिक लोड कम करने के उद्देश्य से चिंतामन से नईखेड़ी तक रेलवे बायपास बनाया जा रहा है। इस रेल लाइन का अलाइनमेंट सामने आते ही यह परियोजना विवादों में उलझ गई।
परियोजना का विवरण
प्रभावित ग्राम दाउदखेड़ी, चिंतामन, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बा के 85 सर्वे नंबरों वाले किसानों की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहीत की जानी है। इन किसानों ने अलाइनमेंट पर ही आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि रेलवे अधिकारियों ने अन्य दो अलाइनमेंट से प्रभावित लोगों से पैसे लेकर पटरी को उनके खेतों की तरफ प्रस्तावित किया है।
परियोजना का विवरण
चिंतामन-नईखेड़ी रेल लाइन को जोड़ने के लिए रेलवे 189.04 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इस परियोजना के तहत 8.60 किलोमीटर नई पटरी बिछाकर नया बायपास मार्ग तैयार किया जाएगा।
परियोजना का विवरण
इससे इंदौर से नागदा की ओर जाने वाली ट्रेनों को उज्जैन स्टेशन लाए बगैर सीधे बायपास से निकाला जा सकेगा। इस व्यवस्था से इंजन रिवर्सल का समय बचेगा और स्टेशन का ट्रैफिक 30% तक कम होने की उम्मीद है।
अन्य रेल परियोजना
मनमाड़-इंदौर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना में भी तेजी आई है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 349.789 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
