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2026-07-24

हाईकोर्ट ने दहेज एक्ट की FIR निरस्त की, समझौते के बाद मुकदमा जारी रखना उत्पीड़न

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने दहेज एक्ट के तहत दर्ज एक एफआईआर को निरस्त कर दिया है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सक्षम अदालत में समझौते के बाद आपराधिक मुकदमा जारी रखना उत्पीड़न है।

आपसी समझौते का विवरण

यह मामला जबलपुर में घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत सक्षम न्यायालय के समक्ष लंबित था। इस दौरान आपसी समझौता हुआ था, जिसकी शर्त मुकदमे वापस लेना थी। हालांकि, आपसी समझौते के बाद भी पत्नी दहेज एक्ट के तहत पति तथा ससुराल पक्ष के खिलाफ दर्ज प्रकरण वापस लेने को तैयार नहीं थी।

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याचिका और वैवाहिक विवाद

पन्ना निवासी तौसीफ राइन व अन्य की तरफ से दहेज एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। तौसीफ का विवाह 25 दिसंबर 2017 को हुआ था। पत्नी ने साल 2020 में पति, सास, ससुर, विवाहित ननद और देवर के खिलाफ दहेज एक्ट का प्रकरण दर्ज करवाया था। यह प्रकरण पत्नी के ससुराल छोड़कर जाने के बाद दर्ज किया गया था और न्यायालय में लंबित है।

समझौते की शर्तें और न्यायालय का अवलोकन

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि सक्षम अदालत ने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत कार्यवाही के दौरान आपसी समझौते को मंजूरी दी थी। इस समझौते में शिकायतकर्ता ने उल्लेख किया था कि उसे अपना स्त्रीधन, शादी का सामान, मेहर की रकम और कार मिल गई है। उसने यह भी कहा था कि वह सभी लंबित मुकदमे वापस ले लेगी। समझौते पर शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर हैं। शिकायतकर्ता ने याचिका का विरोध किया, लेकिन कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। समझौते में यह भी उल्लेख किया गया था कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद काफी हद तक खत्म हो चुका है।

आपराधिक कार्यवाही जारी रखने पर टिप्पणी

न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे हालात में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से न्याय नहीं होगा और दोनों पक्षों के बीच मुकदमेबाजी लंबी खिंचेगी। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि शिकायतकर्ता ने सामान्य आरोप लगाए हैं। याचिकाकर्ता सास और ननद के खिलाफ आरोप बहुत सामान्य प्रकृति के हैं। याचिकाकर्ता ननद शादीशुदा है और जबलपुर में अपने पति के साथ अलग रहती है। न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उसे केवल पति के साथ उसके रिश्ते के कारण फंसाया गया है। आपराधिक मुकदमे को पति के साथ रिश्ते की वजह से रिश्तेदारों के खिलाफ जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। चार्जशीट में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ क्रूरता या दहेज की मांग के विशिष्ट कार्यों को साबित करने वाले तथ्य नहीं थे। विवादों के निपटारे और विशिष्ट आरोपों के अभाव के बावजूद आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से उत्पीड़न होता है। सक्षम अदालत के सामने दोनों के बीच हुए समझौते को ध्यान में रखते हुए आपराधिक मुकदमा जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।