बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में छोटा गणपति (मल्हारगंज) में मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशन की खुदाई से डरे रहवासियों के बाद अब बंगाली चौराहे से पलासिया के बीच बन रहे नए अलाइनमेंट ने हड़कंप मचा दिया है।
पूर्व में बताया जा रहा था कि अंडरग्राउंड ट्रैक कनाड़िया रोड के समानांतर गुजरेगा। हालांकि, हाल ही में वंदना नगर, गोयल नगर, साईंनाथ कॉलोनी, तिलक नगर और संविद नगर में मेट्रो द्वारा शुरू किए गए मिट्टी परीक्षण (सॉइल टेस्टिंग) से रहवासी भयभीत हैं।
अंडरग्राउंड टनल अब कनाड़िया रोड के नीचे से न जाकर सघन कॉलोनियों और हजारों मकानों के नीचे से गुजरने की तैयारी में है।
इससे चिंतित रहवासी मेट्रो के जीएम आरएस राजपूत से मिलने पहुंचे और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
रहवासियों का तर्क है कि जब 200 फीट चौड़ी रोड उपलब्ध है, तो 2 से 3 हजार मकानों की नींव और ट्यूबवेल को खतरे में क्यों डाला जा रहा है?
रूट की जानकारी
मेट्रो के जीएम ने रहवासियों को अलाइनमेंट की जानकारी देते हुए बताया कि पहला अंडरग्राउंड स्टेशन खजराना के बाद बंगाली चौराहे पर बनेगा।
बंगाली चौराहे से मेट्रो कनाड़िया रोड छोड़कर एक लंबा टर्न लेगी। यह टनल शकुंतला हॉस्पिटल, गोयल नगर से होती हुई साईंनाथ कॉलोनी, वंदना नगर, तिलक नगर और पत्रकार कॉलोनी के मकानों के नीचे से गुजरेगी।
दूसरा अंडरग्राउंड स्टेशन रवींद्र नगर गायत्री मंदिर के आगे पलासिया पुलिस लाइन के समीप बनेगा। यहां से मेट्रो एमजी रोड की ओर जाएगी।
मेट्रो जीएम का दावा और आश्वासन
रहवासियों के विरोध पर जीएम राजपूत ने बताया कि अभी अलाइनमेंट और परीक्षण का काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद जन-सर्वे किया जाएगा, जिसमें टनल के ऊपर आने वाले मकानों को चिन्हित कर उनकी वर्तमान स्थिति दर्ज होगी।
जीएम के अनुसार, टनल जमीन से 50 से 60 फीट की गहराई पर बनेगी, जबकि सामान्य मकानों की नींव 10 से 15 फीट गहरी होती है।
रहवासियों की चेतावनी
गोयल नगर रहवासी संघ और आसपास की कॉलोनियों के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि अलाइनमेंट में बदलाव नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
रहवासियों के मुख्य बिंदु
रहवासियों ने चौड़ी सड़क का विकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि 200 फीट चौड़ी संविद नगर रोड से बिना किसी तोड़-फोड़ या मकानों को खतरे में डाले आसानी से टनल बनाई जा सकती है।
उन्होंने कानूनी व व्यावहारिक अड़चनों का भी उल्लेख किया, जिसमें कॉलोनियों के बीच से लाइन निकालने पर जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और विस्थापन जैसी समस्याएं आएंगी। नई योजना से लगभग 5 हजार लोग प्रभावित होंगे।

