बुलंद सोच, भोपाल।

दुर्घटना में घायलों और गंभीर रोगियों को बड़े अस्पतालों में पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने दो वर्ष पहले पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रुचि नहीं होने तथा प्रचार-प्रसार के अभाव के चलते रोगी इस सेवा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
एयर एंबुलेंस संचालित करने वाली कंपनी को निर्धारित शर्त के अनुसार सरकार प्रतिमाह 100 घंटे का किराया अनिवार्य तौर पर चुका रही है। हालांकि, इसका केवल 40 प्रतिशत ही उपयोग हो पा रहा है।
कंपनी एक हेलीकॉप्टर और एक विमान एंबुलेंस के लिए उपलब्ध करा रही है, जिसका एक वर्ष का किराया 35 करोड़ रुपये बनता है। दूसरी ओर, एक वर्ष में एयर एंबुलेंस की सेवा लेने वाले रोगियों की संख्या 100 भी नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठकों में कई बार इस सेवा का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। जिलों में कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की यह जिम्मेदारी है कि वे आमजन और अस्पतालों को इस सेवा के बारे में बताएं।
प्रदेश के 55 में से 30 जिलों से अभी तक एक भी रोगी को इस सेवा का लाभ नहीं मिला है, जबकि यह मुख्यमंत्री की एक महत्वाकांक्षी पहल है। मई 2022 में शुरू हुई इस सेवा को मई 2024 में दो वर्ष पूरे हो चुके हैं।
सेवा प्राप्त करने की प्रक्रिया
आम व्यक्ति सीधे एंबुलेंस नहीं बुला सकता है, इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है। पहली जिम्मेदारी संबंधित अस्पताल की होती है कि वह सीएमएचओ को सूचित करे। सीएमएचओ द्वारा कलेक्टर को जानकारी देने के बाद यह सेवा उपलब्ध होती है।
जिलों में सीएमएचओ की रुचि नहीं होने के कारण निजी या सरकारी अस्पताल भी उदासीन हैं। एक हेल्पलाइन नंबर भी है, लेकिन उसका भी प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है।
वित्तीय व्यय और उपयोग
न्यूनतम 100 घंटे की भुगतान की शर्त के अंतर्गत प्रतिमाह लगभग 30 रोगियों को इतनी ही राशि में सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। वर्तमान में एक माह में औसतन केवल सात रोगियों को ही लाभ मिल पा रहा है।
सरकार को विमान के लिए दो लाख 35 हजार रुपये प्रति घंटे के हिसाब से 60 घंटे और हेलीकॉप्टर के लिए तीन लाख 90 हजार रुपये प्रति घंटे के हिसाब से 40 घंटे का भुगतान हर हाल में करना होता है। एक वर्ष का यह खर्च 35 करोड़ रुपये होता है।
सेवा में देरी या अन्य शर्तों का पालन नहीं होने पर भुगतान में कुछ कटौती भी की जाती है।
जिलावार लाभ की स्थिति
योजना के अंतर्गत मई 2024 से जुलाई 2026 तक कुल 159 रोगियों को इस सेवा का लाभ मिला है।
इनमें से 56 रोगी यानी 35 प्रतिशत रीवा जिले के हैं। रीवा का रोगी इस एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने वाला पहला रोगी था। वहां प्रचार-प्रसार होने से आमजन और अस्पताल संचालक भी जागरूक हुए।
झाबुआ और आलीराजपुर जैसे जिलों में, जहां मेडिकल कॉलेज भी नहीं हैं और बहुतायत में आयुष्मान योजना के हितग्राही भी हैं, एक भी रोगी को सेवा का लाभ नहीं मिला है।
सेवा लेने वालों में 33 गैर-आयुष्मान रोगी भी शामिल हैं।

