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जबलपुर निरंतपुर समिति में किसान क्रेडिट कार्ड फर्जीवाड़ा: विधानसभा में मामला उठने के बाद 11 साल बाद जांच शुरू

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

जबलपुर जिले की निरंतपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।

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वर्ष 2015 में आठ लोगों को करीब 18 लाख रुपये का केसीसी ऋण स्वीकृत किया गया था, जिसमें बाद की जांच में पता चला कि इनमें से सात व्यक्ति किसान नहीं थे, फिर भी उन्हें किसान दर्शाकर ऋण का लाभ दे दिया गया।

इस फर्जीवाड़े की शिकायतें उसी समय हुई थीं, लेकिन कार्रवाई की जगह मामला फाइलों में दबा दिया गया।

वर्ष 2023 में इस प्रकरण को जांच शाखा को सौंपा गया था, परंतु जांच प्रतिवेदन को ‘अपूर्ण और अस्पष्ट’ बताते हुए मामले को फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

करीब 11 साल तक जिम्मेदार विभाग और अधिकारी इस मामले को ठंडे बस्ते में डालते रहे, और इस दौरान ऋण की वसूली भी प्रभावी ढंग से नहीं की गई।

विधानसभा में मामला उठने के बाद कार्रवाई

पनागर विधायक सुशील तिवारी इंदू ने विधानसभा में इस मामले को उठाया, जिसके बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, जबलपुर हरकत में आया।

जवाब में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने स्वीकार किया कि पहले की जांच संतोषजनक नहीं थी और अब पूरे मामले की पुनः जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

शुरुआती जांच में ही कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है।

संदिग्ध भूमिकाएं और अन्य अनियमितताएं

नई जांच में तत्कालीन समिति प्रबंधक रमेश सोनी और तत्कालीन अध्यक्ष प्रहलाद पटेल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

जांच दल के प्रतिवेदन के आधार पर बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच पूरी होने तक सेवानिवृत्त प्रबंधक रमेश सोनी के अंतिम भुगतान पर रोक लगा दी है, जबकि तत्कालीन अध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उपायुक्त सहकारिता, जबलपुर को पत्र भेजा गया है।

पनागर विधायक सुशील इंदु तिवारी ने बताया कि आठ में से सात फर्जी किसानों को 18 लाख रुपये बांटे गए थे, और इस प्रकरण को दबा दिया गया था, लेकिन इस बार विधानसभा में मामला उठने पर जांच हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सबसे बड़ी गड़बड़ी यह है कि जिस व्यक्ति ने यह पूरा फर्जीवाड़ा किया, उसे ही पुरस्कृत करते हुए समिति का प्रशासक बना दिया गया।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के सीईओ नीतेश जिंदल ने कहा कि निरंदपुर सेवा सहकारी समिति में किसानों को बांटे गए केसीसी ऋण में फर्जी किसानों को ऋण बांटने की शिकायत की गई थी। इस प्रकरण की प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी हुई थी, और अब इसकी पुनः जांच के लिए बैंक के चीफ मैनेजर, ब्रांच मैनेजर और मार्केटिंग अधिकारी सहित तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, निरंतपुर समिति में गड़बड़ियां केवल केसीसी ऋण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि धान-गेहूं की खरीदी, किसानों के भुगतान और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े मामलों में भी वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं।

करीब 11 वर्ष तक यह सवाल उठ रहा है कि इस पूरे मामले की शिकायतों और प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी सामने आने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जिसका जवाब अभी तक सामने नहीं आया है।