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2026-07-25

कैलाश विजयवर्गीय पर ‘कीड़ा’ कहने का आरोप, विधानसभा अध्यक्ष ने रिकॉर्ड में नहीं पाया शब्द

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

विधानसभा के भीतर और बाहर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर दिल्ली के जंतर मंतर में आंदोलन कर रहे युवाओं को ‘कीड़ा’ (काकरोच) कहने पर आपत्ति जताई।
बुधवार को विधानसभा में इसे लेकर आधा घंटा बहस हुई।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह शब्द उन्होंने बोला ही नहीं, चाहें तो कार्यवाही विवरण दिखावा लें।
उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष माफी मांगे या खेद जताएं, इसकी मांग नहीं करते हैं, लेकिन स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि उन्होंने कार्यवाही दिखवाई है, उसमें इस शब्द का उपयोग नहीं है।

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विजयवर्गीय का स्पष्टीकरण और पलटवार

मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के पारित होने के ठीक बाद संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाए थे कि उन्होंने आंदोलनकारियों को ‘कीड़ा’ कहा था।
उन्होंने ऑडियो-वीडियो दिखाए और कहा कि उन्होंने यह जरूर कहा था कि ‘क्या आप कॉकरोच पार्टी के समर्थक हैं’।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके अलावा एक भी ऐसा शब्द नहीं था जो किसी आंदोलनकारी के खिलाफ हो, लेकिन नेता प्रतिपक्ष द्वारा सदन में ऑन-रिकॉर्ड झूठे आरोप लगाना बहुत गलत है।
इस पर उन्होंने अध्यक्ष से व्यवस्था देने का आग्रह किया।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोले, ‘कॉकरोच आप कहो और माफी हम मांगें’।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और डॉ. सीतासरन शर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि गलत बयानबाजी के लिए इन्हें खेद व्यक्त करना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष की नसीहत

इस विषय पर लंबी बहस के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि निश्चित रूप से कई बार वरिष्ठ सदस्यों से चूक होती है, जो एकदम स्वीकार नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को लेकर हम सबको गंभीर रहना चाहिए, क्योंकि यह रिकॉर्ड भविष्य के लिए रहता है और उदाहरण बनता है।
आने वाली पीढ़ियां इसका अनुसरण करेंगी।
उन्होंने कहा कि जहां तक कार्यवाही विवरण में कुछ शब्दों का उल्लेख यहां पर हुआ, नेता प्रतिपक्ष के मुंह से कैलाश जी के लिए हुआ, उससे उन्हें तकलीफ हुई और जो कैलाश जी की ओर से हुआ उसकी तकलीफ प्रतिपक्ष के लोगों को हुई।
कुल मिलाकर, जब हम व्यक्ति के लिए बोल रहे हैं तो हमें ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वह बात बहुत दूर तक जाती है।
उन्होंने यह भी हिदायत दी कि आगे से इस प्रकार की कोई बात आएगी तो वह सदन को स्वीकार्य नहीं होगी।