बुलंद सोच, भगवानपुरा (खरगोन)।

खरगोन जिले के भगवानपुरा विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में स्थित वन ग्राम धरमपुरी का डोंगल्यापानी गांव आज भी प्रशासनिक दावों और विकास के नारों की कड़वी हकीकत बयां कर रहा है। आजादी के दशकों बाद भी यहां के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनती कुंदा नदी पार करने को विवश हैं।
ग्रामीणों को पीपलझोपा पहुंचने के लिए एक ही नदी को पांच बार पार करना पड़ता है। वर्षाकाल में यह गांव किसी टापू में तब्दील हो जाता है।
गांव में मरीजों और गर्भवती महिलाओं की स्थिति सबसे बदतर है, जिन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तो दूर, पक्की सड़क तक नसीब नहीं है। स्वजन और ग्रामीण मजबूरी में मरीजों को खटिया पर लेटाकर या कपड़े की झोली बनाकर उफनती नदी पार कराने का जानलेवा जोखिम उठाते हैं।
गांव के राकेश नार्वे ने बताया कि पुल और सड़क निर्माण के लिए लंबे समय से गुहार लगाई जा रही है। दो साल पहले ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सड़क निर्माण का ज्ञापन सौंपा था।
वहीं, राकेश के पिता तूफानसिंह नार्वे ने विधायक को भी लिखित में आवेदन देकर पुल निर्माण की मांग की थी, इसके बावजूद आज तक स्थिति जस की तस है।
ग्रामीणों का कहना है कि डोंगल्यापानी, खरतिया फालिया और सूरया फालिया के करीब 90 परिवारों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
धरमपुरी होकर जाने वाला 10 किलोमीटर का वैकल्पिक रास्ता भी बदहाली का शिकार है। वहां जाने के लिए भी एक नदी और नाले पार करने पड़ते हैं। यह पूरा मार्ग कच्चा और पथरीला है।
ग्रामीणों का तर्क है कि इस 10 किलोमीटर लंबे रास्ते पर सड़क, घाट कटिंग और निर्माण कार्य कराने की तुलना में डोंगल्यापानी के सीधे रास्ते पर पुल-पुलियाएं बनाने में लागत काफी कम आएगी।
यदि यहां पुल बन जाता है तो पीपलझोपा और भगवानपुरा मुख्यालय के साथ-साथ झिरन्या ब्लाक के रायलबेड़ा, टांडावाड़ी और धुपा जैसे वनांचल गांव सीधे सड़क संपर्क से जुड़ जाएंगे।
एसएल गुथरे, एसडीओ आरईएस, भगवानपुरा ने बताया कि डोंगल्यापानी में कुंदा नदी पर पुल-पुलियाओं के निर्माण के प्रस्ताव पूर्व में भेजे गए थे। उन्होंने कहा कि एक बार फिर स्मरण पत्र भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।

