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2026-08-10

मां से दुष्कर्म के आरोप में दस साल जेल में रहे व्यक्ति को हाई कोर्ट ने बरी किया, उम्रकैद की सजा निरस्त

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मां से दुष्कर्म के आरोप में 9 मई 2016 से जेल में बंद एक व्यक्ति को लगभग दस वर्ष बाद दोषमुक्त कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने 18 अगस्त 2017 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ट्रायल कोर्ट के उस निर्णय को निरस्त करते हुए आरोपी को बरी किया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि यौन अपराध के मामलों में केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर भी दोषसिद्धि संभव है, लेकिन इसके लिए वह गवाही पूरी तरह विश्वसनीय, सुसंगत और उच्च स्तर की होनी चाहिए।

इस मामले में अदालत को पीड़िता और अन्य गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विसंगतियां मिलीं, जिससे अभियोजन की कहानी पर संदेह उत्पन्न हुआ। अदालत ने यह भी पाया कि कथित घटना के लगभग दो महीने बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

जिस मोबाइल रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया था, उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत ही नहीं किया गया। इसके अलावा, स्वतंत्र और वैज्ञानिक साक्ष्य भी आरोपों की पुष्टि करने में असफल रहे।

फैसले में हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाहों के आरोपी के साथ पहले से विवादपूर्ण संबंध थे। ऐसी परिस्थितियों में उनके बयानों का अधिक सतर्कता से परीक्षण आवश्यक था।

अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य और गवाहियों के आधार पर अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इन्हीं कारणों से हाई कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा निरस्त कर दी और निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य प्रकरण में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।