बुलंद सोच, भोपाल।
प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की कमी वर्षों से बनी हुई है। आदिवासी विकासखंडों में यह स्थिति बेहद खराब सामने आई है। स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा पिछले माह सिर्फ आदिवासी ब्लॉकों में डॉक्टरों के रिक्त पदों की जानकारी एकत्र की गई थी।
जानकारी के अनुसार, आदिवासी ब्लॉकों में विशेषज्ञों के स्वीकृत 674 पदों में से मात्र 68 ही कार्यरत हैं। इनमें से केवल 56 डॉक्टर ही नियमित हैं।
प्रदेश में कुल 89 ऐसे ब्लॉक हैं, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। विशेषज्ञों की अनुपलब्धता के कारण रोगियों को उपचार के लिए पास के जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है।
आदिवासी ब्लॉकों में चिकित्सा अधिकारियों के 1078 स्वीकृत पदों में से 1152 पदस्थ हैं। हालांकि, इनमें से केवल 372 डॉक्टर ही नियमित हैं, जबकि शेष संविदा या बंधपत्र के अंतर्गत पदस्थ डॉक्टर हैं।
मरीजों पर असर और योजनाओं में बाधा
एक बड़ी समस्या यह भी है कि इन विकासखंडों में निजी अस्पतालों की संख्या भी कम है, जिससे रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण सीजर डिलीवरी भी नहीं हो पा रही है।
गंभीर स्थिति वाली प्रसूताओं को बड़े शासकीय अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
सरकार आयुष्मान योजना के हितग्राहियों को पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा दे रही है, पर विशेषज्ञ नहीं होने के कारण उन्हें भी उपचार नहीं मिल पा रहा है। योजना के तहत हितग्राहियों को निजी अनुबंधित अस्पताल में भी उपचार कराने की पात्रता है, पर इन अस्पतालों की संख्या भी कम है।
प्रदेश के कुल 313 ब्लॉक मुख्यालयों के स्तर पर योजना के अंतर्गत अनुबंधित 100 अस्पताल भी उपलब्ध नहीं हैं।
प्रदेश भर में डॉक्टरों की स्थिति और शासन का पक्ष
मेडिकल कॉलेज छोड़कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक प्रदेश के अन्य सभी अस्पतालों की बात करें तो विशेषज्ञों के 68 प्रतिशत और चिकित्सा अधिकारियों के 42 प्रतिशत पद रिक्त हैं। विशेषज्ञों के 5443 स्वीकृत पदों में से 1745 कार्यरत हैं, जबकि चिकित्सा अधिकारियों के 6513 पदों में से 3824 कार्यरत हैं।
इस संबंध में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि विशेषज्ञ और चिकित्सा अधिकारियों दोनों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया लगातार चल रही है। डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज भी खोले जा रहे हैं।

