बुलंद सोच।

मध्य प्रदेश में दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलने और नौकरी छिनने से जुड़े लगभग 25 साल पुराने प्रावधान को खत्म करने का मामला नौकरशाही स्तर पर अटक गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बावजूद, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) अब तक इससे संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं ला सका है।
पूर्व मुख्य सचिव अनुराग जैन के दिल्ली जाने के बाद यह जानकारी सामने आई है कि उनके कार्यकाल में वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में इस नियम को समाप्त करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। हालांकि, समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण यह मामला कैबिनेट तक नहीं पहुंच सका।

प्रदेश में दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी से रोकने वाले इस प्रावधान का कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार विरोध किया जाता रहा है। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रतिबंध को हटाने की बात कही थी।
राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री स्पष्ट रूप से यह नियम निरस्त करने की बात कह चुके हैं, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी इसे लागू नहीं होने देना चाहते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा के मामले में भी मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद देरी की जा रही है।

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव अनुराग जैन इस नियम को खत्म करने के पक्ष में थे। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप, उन्होंने अपने कार्यकाल में वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में नियम निरस्त करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। हालांकि, समिति के सदस्यों ने इस पर सहमति नहीं दी, जिसके कारण यह प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आ सका।
लगभग एक माह पहले मुख्यमंत्री यादव ने एक बार फिर अधिकारियों को इस नियम में बदलाव के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई नया नियम या आदेश जारी नहीं हुआ है। इस मामले में मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्तावित नए नियम पर भी आपत्ति जताई थी।
6 जून 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट में दो से अधिक संतान की पाबंदी को बरकरार रखा गया था। ड्राफ्ट के नियम 5 और 6 में पात्रता और अपात्रता की शर्तें निर्धारित की गई थीं। इसके अनुसार, ऐसा कोई उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक संतान हैं और इनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा।
हालांकि, जुड़वां बच्चों के मामले में राहत का प्रावधान रखा गया था। यदि किसी व्यक्ति का एक बच्चा है और अगली डिलीवरी में जुड़वां या उससे अधिक बच्चे पैदा होते हैं, तो उसे अपात्र नहीं माना जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस प्रावधान को हटाने के निर्देश देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग से ड्राफ्ट तत्काल पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने को कहा था।
मध्य प्रदेश में यह प्रावधान वर्ष 2001 में लागू किया गया था। इसके तहत, 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी की सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अपात्र माना गया था।
इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम-1965 में भी दो से अधिक बच्चों को कदाचार की श्रेणी में रखा गया था।
अब मुख्यमंत्री की मंशा के बावजूद लगभग 25 साल पुराने इस प्रावधान को खत्म करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाने से सरकार और नौकरशाही के बीच मतभेद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

