बुलंद सोच, भोपाल।
प्रदेश में दुष्कर्म के मामले दर्ज करने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के प्रयोग में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। लगभग 10 से 15 प्रतिशत मामलों में पुलिस द्वारा या तो गैरजरूरी धाराएं लगाई जा रही हैं या जरूरी धाराएं नहीं लगाई जा रही हैं।
भोपाल के प्रकरण का उदाहरण
पिछले माह भोपाल के एक थाने में दर्ज प्रकरण में पुलिस ने दुष्कर्म की धारा तो लगाई, लेकिन महिला की शिकायत के बावजूद मारपीट की धारा शामिल नहीं की।
पोक्सो मामलों में आयु के अनुरूप धाराओं का अभाव
इसी प्रकार, पोक्सो प्रकरणों में पीड़िता की आयु के अनुरूप बीएनएस की अलग-अलग धाराएं नहीं लगाई जा रही हैं।
पुलिस मुख्यालय की समीक्षा टीम
पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में तीन कर्मचारियों की एक समीक्षा टीम गठित की है। यह टीम प्रतिदिन दर्ज किए गए मामलों में लगाई गई धाराओं की जांच करती है, और इसी समीक्षा के दौरान ये कमियां सामने आई हैं।
प्रतिदिन दर्ज होने वाले मामले
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में हर दिन 15 से 20 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए जाते हैं।
विवेचना के दौरान सुधार और प्रशिक्षण
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान ही इन गलतियों में सुधार कराया जा रहा है, जिससे कोर्ट में अभियोजन का पक्ष कमजोर न पड़े। इस प्रक्रिया से पुलिसकर्मी अभ्यस्त भी हो रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों को भेजे जा रहे पत्र
सामने आ रही गलतियों का उल्लेख करते हुए समय-समय पर इंदौर-भोपाल के पुलिस आयुक्तों और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखे जा रहे हैं। 15 जुलाई को भी एक पत्र भेजा गया था।
जिला स्तर पर पहले नहीं पकड़ी गईं गलतियां
यह महत्वपूर्ण है कि जो गलतियां अब पुलिस मुख्यालय पकड़ रहा है, उन्हें इसके पहले जिलों में किसी भी अधिकारी ने नहीं देखा था।
सामने आई प्रमुख गलतियां
पोक्सो के मामलों में, पीड़िता की आयु 16 वर्ष से कम होने पर बीएनएस की धारा 65(1) और 12 वर्ष से कम होने पर धारा 65(2) लगाई जानी चाहिए, परंतु इसका ठीक से पालन नहीं हो रहा है।
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले
बीएनएस में शादी का झांसा या झूठा वादा कर दुष्कर्म के मामलों में धारा 69 लगाई जाती है, पर पुलिस कुछ मामलों में इसके साथ ही दुष्कर्म की धारा 64 (जो आईपीसी में धारा 376 थी) भी लगा रही है।
मानसिक विक्षिप्त पीड़िता के प्रकरण
मानसिक विक्षिप्त पीड़िता के प्रकरण में आमतौर पर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 92(घ) का समावेश नहीं किया जा रहा है।
नाबालिग पीड़िता के गर्भवती होने की स्थिति
नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद उसके गर्भवती होने की स्थिति में पोक्सो एक्ट की धारा 5(जे-ii) का समावेश नहीं किया जा रहा है।

