बुलंद सोच, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने एक पिता की अपने बेटे से मुलाकात के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में मुलाकात की तारीख, समय, स्थान, बच्चे को खिलाई जाने वाली सामग्री, फोटो लेने का तरीका और मुलाकात के दौरान उपस्थित रहने वाले व्यक्ति शामिल हैं।
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि रीवा निवासी पिता विशाल, जिसका असली नाम इरशाद है, अपने बेटे से कल्याणपुर, कानपुर में किसी सार्वजनिक स्थान, जैसे मॉल, पार्क या रेस्तरां में मिल सकेंगे। यह मुलाकात 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त, 16 अगस्त और 23 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक होगी।
यह व्यवस्था दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर अंतरिम रूप से लागू रहेगी। कोर्ट ने बच्चे की सुरक्षा और अनावश्यक विवाद से बचने के लिए कहा है कि शुरुआती मुलाकातों में पिता बच्चे को केवल ब्रांडेड पैक्ड खाद्य सामग्री ही खिलाएंगे।
हाई कोर्ट ने पिता को मोबाइल से बेटे के साथ सेल्फी लेने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि किसी तीसरे व्यक्ति से फोटो नहीं खिंचवाई जाएगी। साथ ही, मां से अपेक्षा की गई है कि वह पिता और बेटे को कुछ समय निजी रूप से बातचीत करने का अवसर दें।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि पिता अपने साथ पुलिस, निजी सुरक्षा गार्ड या बाउंसर नहीं ले जाएंगे, ताकि बच्चे के सामने सहज और सामान्य वातावरण बना रहे।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पारिवारिक विवादों में बच्चे का भावनात्मक हित सर्वोपरि है और उसका दोनों माता-पिता से जुड़ाव बना रहना चाहिए।
यह प्रकरण पति-पत्नी के बीच मनमुटाव से जुड़ा है। पत्नी अनुक्रति पांडे पनकी, कल्याणपुर, कानपुर में निवासरत हैं और उनका ढाई वर्षीय बेटा उनकी कस्टडी में है।
पिता विशाल, यानी इरशाद, अपने बेटे से मिल नहीं पा रहे थे, जिसके कारण उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली। अनुक्रति मूलतः उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की रहने वाली हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को नियत की गई है।

