बुलंद सोच, ग्वालियर।
शहर को दहला देने वाले चर्चित अक्षया यादव हत्याकांड में अदालत का फैसला आ गया है। अदालत ने पूर्व डीजीपी की नातिन अक्षया को एकतरफा प्रेम के जुनून में गोलियों से भूनने वाले मुख्य आरोपी सुमित रावत, उसके भाई उपदेश रावत, साजिशकर्ता बाला सर्वे और पृथ्वीराज चौहान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
मुख्य गवाह का दर्द और भय
इस मामले की मुख्य गवाह और वारदात की चश्मदीद सोनाक्षी शर्मा की आंखों के आंसू आज भी सूखे नहीं हैं। फैसले की खबर सुनते ही सोनाक्षी का दर्द फूट पड़ा। नईदुनिया से बात करते हुए उन्होंने रोते हुए कहा कि उनकी मासूम सहेली को छीनने वालों को सिर्फ उम्रकैद मिली है। सोनाक्षी ने कहा कि इन दरिंदों ने उनकी सहेली को मार डाला और उनकी दुनिया घर में ही कैद हो गई, जो किसी सजा से कम नहीं है। उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की।
इस घटना के बाद से अक्षया यादव के परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छिन गईं, वहीं सोनाक्षी और उनका परिवार तब से अब तक खौफ के साये में जी रहा है। सोनाक्षी का स्कूल उसी समय छूट गया था और उन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा घर पर ही पढ़ाई कर दी। इसके बाद उन्होंने बीए में प्रवेश लिया लेकिन कॉलेज नहीं जातीं और प्राइवेट फॉर्म भर घर से ही पढ़ाई करती हैं। सोनाक्षी के घर में ही त्योहार निकल जाते हैं और घर से बाहर निकलना पूरी तरह बंद है। उनकी मां करुणा शर्मा निजी स्कूल में शिक्षिका हैं और पुलिस सुरक्षा में स्कूल आती-जाती हैं। परिवार ने रिश्तेदार और परिचितों के यहां जाना छोड़ दिया है।
सोनाक्षी के स्वजन ने बताया कि घर के बाहर और अंदर कैमरे लगे हैं। वे हमेशा कैमरों की निगरानी में रहते हैं और घर की टीवी पर कभी कैमरों की रिकॉर्डिंग के अलावा कुछ नहीं चलता। कोई भी गाड़ी या कोई पैदल निकलता है और सामान्य ही रुक जाए तो डर लगने लगता है। अदालत ने कातिलों को तो जेल भेज दिया है, लेकिन इस खौफनाक मंजर ने सोनाक्षी से उनका बचपन, आजादी और पढ़ाई का सामान्य माहौल छीन लिया है। तीन साल बीत जाने के बाद भी खौफ का आलम यह है कि सोनाक्षी का घर से बाहर निकलना पूरी तरह बंद है। कानून की नजर में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सोनाक्षी और उनके परिवार के लिए यह फैसला भी उस डर को खत्म नहीं कर पाया है, जिसने तीन साल पहले उनके दरवाजे पर दस्तक दी थी।
अक्षया के पिता की प्रतिक्रिया
अक्षया के पिता ने कहा कि हत्यारों ने उनकी बेटी छीन ली। वे अपनी बेटी को अफसर बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि तीन साल में इन्हें सजा तो हुई लेकिन आजीवन कारावास की सजा मिली। उनके अनुसार, इनका अपराध मृत्यु दंड लायक था, जिससे कोई और अक्षया न मरे। उन्होंने न्याय व्यवस्था पर भरोसा व्यक्त किया।
घटनाक्रम का सिलसिलेवार विवरण
शहर में ठीक तीन साल पहले हुए इस हत्याकांड की घटना 10 जुलाई 2023 को शाम को हुई थी। अक्षया यादव अपनी जूपीटर से लक्ष्मीबाई कॉलोनी से घर जा रही थी और पीछे सहेली सोनाक्षी बैठी थी। बेटी बचाओ चौराहे पर आरोपियों ने गोलियां चलाईं, जिसमें दो गोली अक्षया को लगी। इस घटना से करीब एक साल पहले सोनाक्षी शर्मा के साथ अभद्रता के मामले में सुमित रावत जेल गया था। जेल से छूटते ही वह फिर से रैकी करने लगा और इस वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में तीन दिन के अंदर आठ आरोपी पकड़े गए थे, जिनमें सुमित, उपदेश, बाला सुर्वे, राज चौहान और इनके चार नाबालिग साथी शामिल थे। बाद में 25 जनवरी 2024 को नाबालिग आरोपी बाल सुधार गृह से फरार हो गए थे। इसके बाद 27 फरवरी को सोनाक्षी की मां पर गोली चली थी।
अभियान
आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ितों को सुरक्षा दिलाने के लिए अभियान चलाया था। इस अभियान के बाद आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हुई और पीड़ितों को सुरक्षा भी मिली। अक्षया यादव हत्याकांड को लेकर ‘नईदुनिया’ में खबरें प्रकाशित हुई थीं।

