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2026-07-29

मूंग खरीदी कोटा बढ़ाने की मध्य प्रदेश की मांग केंद्र ने रोकी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक नया विवाद उत्पन्न हो गया है। राज्य सरकार ने किसानों की बढ़ती संख्या और उत्पादन का हवाला देते हुए मूंग खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने हालांकि, इस मांग को फिलहाल स्वीकार करने के बजाय पहले से स्वीकृत लक्ष्य के अनुरूप खरीदी पूरी करने पर जोर दिया है।

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राज्य सरकार की मांग

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय को पत्र लिखकर सूचित किया है कि राज्य में बड़ी संख्या में किसानों ने मूंग बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। अनुमान है कि इस बार लगभग 10 लाख टन मूंग खरीदी के लिए आ सकती है। मंत्री कंसाना ने कहा कि ऐसी स्थिति में मौजूदा 25 प्रतिशत की सीमा पर्याप्त नहीं होगी। उन्होंने मांग की कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी खरीदी का दायरा बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाए, जिससे अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ प्राप्त हो सके।

केंद्र का जवाब

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि ग्रीष्मकालीन सीजन 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश को पहले ही 4.54 लाख टन से अधिक मूंग खरीदने की अनुमति दी जा चुकी है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल मूंग खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को प्राप्त हुआ है। केंद्र के अनुसार, अतिरिक्त कोटे पर तभी विचार किया जाएगा, जब राज्य पहले से स्वीकृत मात्रा की खरीदी पूरी कर लेगा। राज्य के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 52,284 किसानों से 36,682 टन मूंग खरीदी जा चुकी है और खरीदी की प्रक्रिया 10 अगस्त तक जारी रहेगी।

पुराने स्टॉक की चुनौती

मूंग खरीदी बढ़ाने की मांग के बीच राज्य सरकार के सामने पुराना स्टॉक भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। मार्कफेड के गोदामों में पिछले वर्षों की खरीदी गई बड़ी मात्रा अब भी रखी हुई है। पिछले सीजन में निर्धारित कोटे से लगभग 3.5 लाख टन अधिक मूंग खरीदी गई थी। अब इस स्टॉक को खुले बाजार में बेचने की तैयारी चल रही है, जिससे राज्य सरकार को लगभग 3,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है। जानकारी के अनुसार, मूंग की खरीदी लगभग 8,500 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की गई थी, जबकि भंडारण और अन्य खर्च जोड़ने पर इसकी लागत लगभग 9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँच रही है। वहीं, खुले बाजार में बिक्री आमतौर पर इसकी लागत से 20 से 30 प्रतिशत कम कीमत पर होती है।