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2026-07-29

दतिया उपचुनाव: भाजपा-कांग्रेस में भीतरघात हावी, विकास के मुद्दे गौण

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, दतिया।

दतिया विधानसभा उपचुनाव अंतिम चरण में है, मतदान में केवल तीन दिन शेष हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे प्रमुख नेता प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए जनता से समर्थन की अपील कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का आज एक बड़ा रोड शो भी निर्धारित है। हालांकि, यहां की चुनावी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच कम, बल्कि दोनों दलों के भीतर अधिक दिखाई दे रही है।

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भाजपा में आंतरिक चुनौतियाँ

भाजपा ने छह बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर संघ पृष्ठभूमि के आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इस निर्णय के बाद चुनाव का मुख्य मुद्दा विकास से हटकर संगठन, समर्थकों की नाराजगी और भीतरघात बन गया है। दोनों ही प्रमुख दलों के लिए अपने ही लोगों की नाराजगी सबसे बड़ी चिंता का विषय है। भाजपा ने अपने मंत्रियों, विधायकों और संगठन की पूरी शक्ति झोंक दी है, जबकि कांग्रेस ने भी समानांतर घेराबंदी की है। चुनावी चर्चाओं में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि किस दल का भीतरघात अधिक प्रभावी होगा।

नरोत्तम कार्ड और कांग्रेस की रणनीति

डॉ. नरोत्तम मिश्रा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, फिर भी पूरा चुनाव उन्हीं के इर्द-गिर्द केंद्रित है। भाजपा की हर बड़ी सभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रत्याशी आशुतोष तिवारी यह संदेश दे रहे हैं कि चुनाव डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मार्गदर्शन में लड़ा जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नामांकन के दौरान भावुक होने की घटना को अलग तरीके से लिया है। कांग्रेस का मानना है कि टिकट कटने से नाराज समर्थकों का एक वर्ग भाजपा से दूरी बना सकता है।

कांग्रेस की गुटबाजी और अन्य दलों का प्रभाव

कांग्रेस में भी गुटबाजी खुलकर सामने आई है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती प्रचार से दूर हैं, जबकि अवधेश नायक के समर्थक चुनावी नतीजों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। राजेंद्र भारती ने पार्टी के प्रत्याशी घनश्याम सिंह के उन बयानों पर सवाल उठाए हैं, जो कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने वाले हैं। आजाद समाज पार्टी (आसपा) के प्रत्याशी दामोदर यादव भी समीकरण बदल रहे हैं, जिससे कांग्रेस चिंतित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुसूचित जाति (एससी) के वोटों में सेंध लगने का सबसे अधिक असर कांग्रेस पर पड़ेगा।

मतदाताओं के मुद्दे और जातीय समीकरण

मुख्य बाजार में व्यापारियों का कहना है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं, गांवों में मतदाता प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और जातीय समीकरण को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। दतिया में कुल 2.20 लाख मतदाता हैं, जिनमें सबसे बड़ा वोट बैंक लगभग 40 हजार कुशवाह समाज का है। इसके बाद 34 हजार ब्राह्मण, 28 हजार अहिरवार और 17 हजार यादव मतदाता हैं। भाजपा ने भारत कुशवाह को और कांग्रेस ने सिद्धार्थ कुशवाह को चुनाव प्रभारी बनाया है। ग्रामीण इलाकों में नगर सिंचाई योजना और डिफेंस पार्क जैसे मुद्दे प्रमुख हैं, जिनका समाधान मतदाता चुनाव के बाद देखना चाहते हैं।