बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट 7 अगस्त को सुनवाई करेगा।
इससे पहले 24 जुलाई को प्रस्तावित सुनवाई किसी कारणवश स्थगित हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच को अगले महीने लगभग एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। आगामी सुनवाई इस मामले में अहम मानी जा रही है।
शीर्ष अदालत के पूर्व आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार ने अब तक अभियोजन स्वीकृति और अन्य निर्देशों के पालन को लेकर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट भी अभी तक दाखिल नहीं की गई है।
अब 7 अगस्त को होने वाली सुनवाई से पहले राज्य सरकार को अदालत में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी।
गौरतलब है कि अगस्त में ही मंत्री विजय शाह के बयान की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट को भी पूरा एक साल हो जाएगा, लेकिन सरकार इस पर अभियोजन की मंजूरी को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार की ढिलाई पर कई बार सख्त नाराजगी जता चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि एसआईटी अगस्त 2025 में ही जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप चुकी है, फिर भी अभियोजन की मंजूरी पर फैसला क्यों नहीं लिया गया? कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने और एसआईटी को मंत्री के पुराने विवादित बयानों की भी जांच करने के निर्देश दिए थे।
शीर्ष अदालत ने 8 मई को सख्त रुख अपनाते हुए ‘इनफ इज इनफ’ कहा और चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने की हिदायत दी थी।
अदालत को 24 जुलाई को सूचित किया गया कि नोटिस की तामील और अतिरिक्त हलफनामे दाखिल होने के बावजूद पिछले आदेशों का पालन अब तक नहीं हुआ है।

