बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बताया कि मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संशोधन विधेयक 2026 में संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मापदंडों को पूरा करने के लिए है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने और निवेश करने वालों को सरलता प्रदान करना है।
मंत्री ने यह भी बताया कि 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता को कम किया जा रहा है, लेकिन प्रावधान आवश्यकतानुसार ही होगा।
इसके अतिरिक्त, 5 करोड़ की निधि के प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि यदि कोई विश्वविद्यालय बंद होता है तो छात्रों की पढ़ाई पर कोई प्रभाव न पड़े।
शैक्षणिक व्यवस्था एवं प्रवेश
सत्र के दौरान एक सदस्य ने टांटिया मामा भील विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया।
इस पर मंत्री परमार ने जवाब दिया कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है और यह दो महीने में पूरी हो जाएगी, क्योंकि किसी भी विश्वविद्यालय को स्थापित होने में स्वाभाविक रूप से चार-पांच साल लगते हैं।
प्रवेश प्रक्रिया पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में वर्तमान में अधिक प्रवेश हुए हैं और 31 जुलाई तक सभी प्रवेश पूरे करने का प्रयास किया जाएगा।
मंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि सत्र समय पर चलेंगे और परीक्षाएं समय पर तथा सख्ती के साथ कराई जाएंगी।
परीक्षा मूल्यांकन एवं पारदर्शिता
कॉपी जांचने के संबंध में उन्होंने बताया कि डिजिटल वैल्यूएशन के माध्यम से कॉपियां जांचने वाले के पास समय पर पहुंचेंगी और समय पर वापस भी होंगी।
मंत्री ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रश्न पत्र लीक से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, और जहां से शिकायतें मिली थीं, उन्हें ठीक करने का प्रयास किया गया है।
