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2026-08-12

रतलाम में ड्रग सिंडिकेट पर रिकॉर्ड कार्रवाई, छह माह में 14 किलो से अधिक एमडी जब्त

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, रतलाम।

राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआइ) ने रतलाम जंक्शन पर दिल्ली से मुंबई जा रही एक ट्रेन में एक नाइजीरियाई महिला के कब्जे से दो किलोग्राम एम्फेटामाइन ड्रग जब्त की। इस कार्रवाई ने दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है।

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प्रारंभिक जांच में महिला का रतलाम से कोई संबंध सामने नहीं आया है और न ही बरामद मादक पदार्थ का स्रोत रतलाम बताया गया। महिला को केवल खुफिया सूचना के आधार पर रतलाम जंक्शन पर पकड़ा गया था। इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या रतलाम ड्रग का नया हब बन रहा है या फिर यह देश के सबसे व्यस्त कॉरिडोर पर सुरक्षा एजेंसियों का एक महत्वपूर्ण इंटरसेप्शन पॉइंट बन चुका है।

रतलाम की रणनीतिक स्थिति

मध्य प्रदेश पुलिस की इस क्षेत्र पर लगातार नजर बनी हुई है। रतलाम की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यह पश्चिम रेलवे का एक प्रमुख जंक्शन है, जहाँ से दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग गुजरता है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और राजस्थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश से अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी इसे उत्तर और पश्चिम भारत के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर बनाती है।

इसी रणनीतिक महत्व के कारण राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआइ), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और मध्य प्रदेश पुलिस की इस क्षेत्र पर लगातार नजर बनी हुई है।

रतलाम से प्रमुख शहरों के लिए आसान कनेक्टिविटी उपलब्ध है। दिल्ली और मुंबई मार्ग पर औसतन हर एक से दो घंटे में प्रीमियम या सुपरफास्ट ट्रेनें मिलती हैं। इंदौर, उज्जैन, दाहोद और नागदा के लिए नियमित पैसेंजर ट्रेनें दिनभर में कई बार चलती हैं। यहाँ से दिल्ली, मुंबई, जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों तक पहुँच आसान है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों से यह स्पष्ट है कि तस्कर अब रतलाम का उपयोग केवल माल की आवाजाही के लिए ही नहीं, बल्कि अवैध मादक पदार्थ निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के लिए भी कर रहे हैं।

ड्रग सिंडिकेट पर रिकॉर्ड कार्रवाई

वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में रतलाम जिले में एमडी (मेफेड्रोन) के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई दर्ज की गई। पुलिस ने आठ थाना क्षेत्रों में 23 प्रकरण दर्ज कर 81 आरोपितों को गिरफ्तार किया और 14.175 किलोग्राम एमडी जब्त की। यह बरामदगी पिछले दो वर्षों की संयुक्त बरामदगी से भी अधिक है। वहीं, पहले पांच महीनों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 41 प्रकरण दर्ज कर 125 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

कई राज्यों तक फैले नेटवर्क के संकेत

जनवरी 2026 में कालूखेड़ा थाना क्षेत्र के चिकलाना गाँव में एक एमडी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। मुख्य आरोपित याकूब राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के देवलदी गाँव का निवासी निकला। जांच से पता चला कि इस फैक्ट्री में निर्मित एमडी मुंबई सहित बड़े महानगरों की हाई-प्रोफाइल पार्टियों तक पहुँचाई जाती थी।

मार्च में पिपलौदा के बोरखेड़ा गाँव में एक और एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई। इस फैक्ट्री का मास्टरमाइंड जमशेद खान उर्फ लाला उर्फ डॉक्टर भी देवलदी का निवासी बताया गया।

इससे पहले, अक्टूबर 2025 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की इंदौर इकाई ने सेजावता गाँव में एक अवैध अल्प्राजोलम निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया था। तेलंगाना से प्राप्त सूचना के आधार पर शुरू हुई जांच में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित अन्य राज्यों तक फैले नेटवर्क के संकेत मिले थे।

हाईटेक निगरानी की आवश्यकता

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, व्यस्त रेल नेटवर्क और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी के कारण ड्रग तस्करी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। ऐसी स्थिति में, डीआरआइ, एनसीबी, पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और अन्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने, आधुनिक स्कैनर, एआई-आधारित निगरानी और संयुक्त अभियानों की आवश्यकता है। वर्तमान में, अधिकांश कार्रवाई मुखबिर तंत्र और टिप-ऑफ पर निर्भर करती है, जबकि जंक्शन पर हाईटेक बैगेज स्कैनिंग और स्थायी डॉग स्क्वाड जैसी सुविधाएँ सीमित हैं।

रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल के अनुसार, रेंज में ड्रग निर्माण से लेकर उसे खरीदने वाले तक सभी पुलिस की रडार पर हैं। तस्करों के स्रोतों को चिह्नित किया जा रहा है और सीमावर्ती क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि मंदसौर, नीमच और रतलाम में विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।