बुलंद सोच, भोपाल।

साध्वी हर्षानंद गिरि ने आश्रम में न रहने संबंधी अपने पूर्व के बयान से यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था।
साध्वी हर्षानंद गिरि ने रविवार को भोपाल से एक वीडियो जारी कर यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी आश्रम या संत समाज पर सवाल उठाना नहीं था, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाना था।
आश्रम में रहने की इच्छा और शर्तें
किचन में खाना बनाते हुए रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो की शुरुआत “जय श्रीराम” से हुई, जिसमें हर्षानंद गिरि ने बताया कि वे आश्रम में रहना पसंद करती हैं। उन्होंने इसका कारण बताया कि वहां उनका समय धर्म-कर्म, अध्ययन और पूजा-पाठ में बीतता है, जबकि घर पर उन्हें घरेलू काम भी करने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई संत, संस्था या आश्रम सुरक्षा की गारंटी दे और यह भरोसा दे कि वहां कोई नुकसान नहीं होगा, तो वे आज भी आश्रम में रहकर सेवा करने के लिए तैयार हैं। साध्वी ने यह भी कहा कि यदि किसी आश्रम की जिम्मेदारी सौंपी जाए तो वे उसे संभालने के लिए भी तैयार हैं।

महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता
वीडियो में हर्षानंद गिरि ने उज्जैन में एक महामंडलेश्वर पर दर्ज रेप के मामले का जिक्र किया और बताया कि आरोपी अब भी फरार है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और इसी कारण वे अपने घर पर खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं।
हर्षानंद गिरि ने भविष्य में एक ऐसा आश्रम बनाने की इच्छा व्यक्त की, जहां घरेलू हिंसा, सामाजिक प्रताड़ना या अन्य कारणों से बेघर हुई महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में कई ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। वीडियो के अंत में उन्होंने “हर-हर महादेव” से अपनी बात समाप्त की।
पूर्व का विवादित बयान
इससे पहले, मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि ने 31 जुलाई को कहा था कि ये कौन से संत हैं, जिन्हें उनकी हर बात बुरी लग जाती है। उन्होंने सवाल उठाया था कि वे खाएं-पहनें, कहीं रहें या किसी से मिलें, तो इन्हें बुरा लग जाता है। उन्होंने संतों को “संत से ज्यादा मेरी सास” बताया था, जो हर बात पर मुंह फुला लेते हैं।
उन्होंने यह भी पूछा था कि जिस समाज में दो महीने की बेटी सुरक्षित नहीं है और हर जगह से रेप तथा अपराध होने की सूचना मिलती है, वहां वे कहां रहें और कहां सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा था कि जो संत उन्हें परिवार के साथ न रहने के लिए कह रहे हैं, वे उनकी सुरक्षा की 100% गारंटी ले लें तो वे उनके आश्रम चली जाएंगी।
साध्वी हर्षानंद गिरि ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि संतों को कब से छोटी-छोटी बातों का बुरा लगने लगा है और उनका गुस्सा पानी के बुलबुलों के समान होता है। उन्होंने कहा था कि संत में तो राग, द्वेष, ईर्ष्या कुछ नहीं होता, संतों में सिर्फ प्यार होता है और वे बड़ी से बड़ी बातों को हवा में उड़ा देते हैं।
मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि कुछ संतों पर निशाना साधने के कारण पहले भी विवादों में रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि वे उनके खाने-पहनने और माता-पिता के साथ रहने को लेकर लगातार टीका-टिप्पणी करते हैं।

