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2026-08-01

साध्वी हर्षानंद गिरि का संतों पर पलटवार: ‘कौन से संत मेरी सास बन गए’

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उज्जैन।

मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर उन संतों पर निशाना साधा है, जो उनके पहनावे, मेकअप और गृहस्थ जीवन को लेकर लगातार टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये कौन से संत हैं, जिन्हें मेरी हर बात बुरी लग जाती है? मैं खाऊं। पहनूं। कहीं रहूं। किसी से मिलूं। कहीं घूमूं तो इन्हें बुरा लग जाता है! ये कौन से संत हैं जो संत से ज्यादा मेरी सास बन गए हैं, जो हर बात पर मुंह फुला लेते हैं!”

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साध्वी हर्षानंद गिरि ने सवाल उठाया कि जिस समाज में दो महीने की बेटी सुरक्षित नहीं है और हर जगह से बलात्कार तथा अन्य अपराधों की सूचनाएं मिलती हैं, वहां वह कहां रहें और कहां सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि जो संत उन्हें परिवार के साथ नहीं रहने के लिए कह रहे हैं, वे उनकी सुरक्षा की सौ प्रतिशत गारंटी लें, तो वह उनके आश्रम चली जाएंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि संतों को कब से छोटी-छोटी बातों का बुरा लगने लगा है और उनका गुस्सा पानी के बुलबुलों के समान क्यों होता है। साध्वी ने जोर देकर कहा कि संत में तो राग, द्वेष, ईर्ष्या कुछ नहीं होता, संतों में सिर्फ प्यार होता है और वे बड़ी से बड़ी बातों को हवा में उड़ा देते हैं।

साध्वी हर्षानंद गिरि ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में अपने गुरुजी के आश्रम जाने पर मीडिया ने उनसे पहला सवाल यह किया कि संतों का आरोप है कि वह कैसी साध्वी हैं, जो माता-पिता के साथ रहती हैं, जबकि साध्वी को मोह-माया और रिश्ते नहीं होते।

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जिन संतों ने आरोप लगाया या जिन्हें परेशानी है, वे बड़े-बड़े आश्रम बना कर बैठे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उनका आश्रम बन जाएगा, तब वह आश्रम में रहेंगी, लेकिन जब तक उनका आश्रम नहीं बनता, तब तक उनके पास दो ही विकल्प हैं। पहला विकल्प अपने गुरुजी का आश्रम है, जहां वह ज्यादा दिन नहीं रहना चाहतीं ताकि उनकी वजह से किसी को परेशानी न हो। दूसरा विकल्प उनके माता-पिता का घर है, जहां वह सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती हैं। उन्होंने पूछा कि तीसरा कौन सा विकल्प बचा जहां वह रहें।

दो दिन पहले गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में मीडिया से बातचीत के दौरान हर्षानंद गिरि ने कुछ संतों और आश्रम व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ संत चोरी-छिपे ब्यूटी पार्लर का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी कथनी और करनी पर सवाल खड़े होते हैं। उनके इन बयानों के बाद संत समाज के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी।

हर्षा रिछारिया ने 18 अप्रैल 2026 को उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद से दीक्षा लेकर संन्यास ग्रहण किया था। दीक्षा के दौरान उन्होंने पिंडदान भी किया और इसके बाद व्यासपीठ से प्रवचन देती नजर आईं।

संन्यास लेने के बाद भी उनके मेकअप, बाल रंगने और परिवार के साथ रहने को लेकर कुछ संतों ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। अब इन्हीं आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर यह तीखी प्रतिक्रिया दी है।