बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर नगर निगम की स्थापना शाखा के दो कर्मचारियों पर अनुपस्थित मस्टरकर्मियों के बैंक खातों में हेरफेर कर उनके वेतन को अपने रिश्तेदारों के खातों में स्थानांतरित करने का आरोप है। यह धांधली दिसंबर से की जा रही थी, जिसमें पांच अनुपस्थित मस्टरकर्मियों के खातों का बार-बार उपयोग किया गया।
स्थापना शाखा में वेतन का काम देखने वाले एक मस्टरकर्मी और एक आउटसोर्स कर्मचारी ने पिछले आठ माह में अनुपस्थित कर्मचारियों के वेतन के नाम पर नगर निगम को 2 लाख 94 हजार रुपये की चपत लगाई।
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब जून माह के वेतन की राशि जुलाई माह में एक अनुपस्थित कर्मचारी के खाते में नहीं पहुंची और राशि का स्थानांतरण विफल हो गया। इसके बाद निगम के अकाउंट विभाग के अधिकारियों ने जांच की, जिससे यह खामी पकड़ में आई।
नगर निगम द्वारा गड़बड़ी की सूचना सोमवार को एमजी रोड थाने को दी गई। स्थापना शाखा के डिप्टी कमिश्नर केशव सिंह सगर की शिकायत पर एमजी रोड पुलिस ने गुरुवार रात को स्थापना शाखा के कर्मचारी अमन सालवी और अनुज पंवार के खिलाफ शासकीय गबन और धोखाधड़ी के मामले में प्रकरण पंजीबद्ध किया।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम में मस्टर कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं और उन्हें पता होता है कि उन्हें वेतन नहीं मिलेगा, जिससे वे वेतन की पूछताछ भी नहीं करते। इसी बात का फायदा उठाते हुए, स्थापना शाखा में वेतन का काम देखने वाले अमन सालवी और अनुज पंवार ने सबसे पहले अनुपस्थित रहने वाले पांच मस्टरकर्मियों को चिन्हित किया।
उन्होंने इन अनुपस्थित कर्मचारियों के वेतन की राशि अपने रिश्तेदारों के खातों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई। ये दोनों कर्मचारी हर माह तय करते थे कि किस कर्मचारी के खाते में वेतन की राशि जाएगी और उन्होंने इस काम को बखूबी अंजाम दिया। पिछले आठ माह में, इन्होंने पांच अनुपस्थित कर्मचारियों की आईडी का उपयोग किया, जिसमें किसी माह दो तो किसी माह तीन से चार अनुपस्थित कर्मचारियों की आईडी इस्तेमाल की गईं।
ये अनुपस्थित कर्मचारियों की आईडी का उपयोग कर उनके बैंक अकाउंट और आईएफएससी कोड हटा देते थे। उनके स्थान पर दोनों कर्मचारी अपने करीबी रिश्तेदारों के बैंक अकाउंट और आईएफएससी कोड डालते थे। इसके बाद, अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के नाम पर वेतन निगम के खाते से जारी किया जाता था, जो अमन और अनुज के रिश्तेदारों के खातों में पहुंचता था।

