बुलंद सोच, भोपाल।
करीब तीन दशक यानी 30 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद कर्मफलदाता शनिदेव एक बार फिर मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं। शनि की यह वक्री चाल 27 जुलाई 2026 की रात 12:27 बजे से शुरू होगी। यह वक्री चाल अगले 138 दिनों तक जारी रहेगी और 11 दिसंबर 2026 को शनिदेव पुनः मार्गी होंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, शनि की इस उल्टी चाल के कारण देश की राजनीति, न्याय व्यवस्था, कृषि, श्रमजीवी वर्ग और मौसम में महत्वपूर्ण घटनाक्रम व हलचल देखने को मिल सकते हैं। ज्योतिषाचार्य न्यूसी समैया के अनुसार, वर्तमान में शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। वक्री होने के बाद उनका प्रभाव अत्यधिक सक्रिय हो जाता है।
प्रभावित क्षेत्र और समीक्षा का समय
शनि को कर्मफलदाता तथा न्याय व्यवस्था, श्रमजीवी वर्ग, कृषि, भूमि, खदान, कोयला, पेट्रोलियम, तेल और प्राकृतिक संसाधनों का कारक ग्रह माना गया है। इस अवधि में इन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे देश में प्रमुखता से उभरेंगे। वक्री शनि का यह काल नई योजनाएं शुरू करने के बजाय पुराने, अधूरे और लंबे समय से अटके कार्यों को पूरा करने, आत्ममंथन करने तथा अपने कर्मों की समीक्षा करने का माना जाता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान आकलन
इससे पहले 19 जुलाई 1996 से 4 दिसंबर 1996 तक शनिदेव मीन राशि में वक्री रहे थे। उस दौरान भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव देखे गए थे। कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे एकछत्र वर्चस्व को चुनौती मिली थी। गठबंधन राजनीति को मजबूती मिली थी और भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी थी। संयुक्त मोर्चा सरकार के गठन के साथ क्षेत्रीय दलों की भूमिका निर्णायक बनी थी। ज्योतिषाचार्यों का आकलन है कि इस बार भी 138 दिनों की इस वक्री अवधि में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
राजनीति, न्यायपालिका और मौसम का मिजाज
इस अवधि में संसद में गतिरोध, विपक्ष के बड़े आंदोलन और श्रमिक वर्ग से जुड़े मुद्दे गरमा सकते हैं। न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और बड़े फैसलों पर देशभर में व्यापक चर्चा हो सकती है। शिक्षा व न्याय व्यवस्था से जुड़े दूरगामी निर्णय सामने आ सकते हैं। तटीय क्षेत्रों में आंधी-तूफान, असमय बारिश या प्राकृतिक हलचल की आशंका बनी रहेगी।
बारह राशियों पर वक्री शनि का प्रभाव
मकर और कुंभ राशि के जातकों के लंबे समय से रुके कार्यों में सफलता मिलेगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सकारात्मक प्रगति के योग हैं। मीन, मेष और कुंभ राशि वालों को धैर्य और संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है। इन्हें अनावश्यक विवादों, जल्दबाजी और जोखिम भरे फैसलों से बचना चाहिए। वृषभ, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। मीन राशि के स्वामी गुरु के अस्त होने से इन्हें विशेष सतर्कता बरतनी होगी।
शनि के शुभ प्रभाव हेतु ज्योतिषीय उपाय
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से शनि के प्रभाव को शुभ और अनुकूल बनाए रखने के लिए निम्नलिखित उपाय करने की सलाह दी गई है। शनिवार को “ॐ शं शनैश्चराय नम:” मंत्र का 108 बार जाप करें। पीपल और शमी के वृक्ष पर जल अर्पित करें तथा सरसों के तेल का दीपक जलाएं। सरसों के तेल में अपना प्रतिबिंब देखकर छाया दान करें और तेल किसी शनि मंदिर या जरूरतमंद को दें। शनिवार के दिन काली उड़द, काले तिल, लोहे की वस्तुएं और काले वस्त्र का दान करें। हनुमान चालीसा या शिव चालीसा का नियमित पाठ करें। शनिवार को शिवलिंग पर काले तिल व शमी पत्र चढ़ाएं। गरीबों, श्रमिकों, कर्मचारियों और बुजुर्गों का सम्मान करें तथा यथासंभव उनकी मदद करें।

