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2026-08-10

उज्जैन में शिप्रा आरती पर तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति में विवाद

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उज्जैन।

तीर्थ नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी की आरती को लेकर तीर्थ पुरोहितों और महाकाल मंदिर समिति के बीच विवाद छिड़ गया है। यह विवाद मंदिर समिति द्वारा श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान के 21 बटुकों से शिप्रा आरती कराने से शुरू हुआ है। प्रशासन ने दूसरे दिन शनिवार को भी बटुकों से आरती कराई। समिति ने कहा कि यह पूरा आयोजन निःशुल्क होगा। तीर्थ पुरोहित इस पर आपत्ति कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिप्रा नदी के तट पर तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान पूजन के अलावा नदी की आरती उनकी पांच सौ वर्षों की परंपरा है। इसे उनसे छीना जा रहा है। अगर भव्यता के नाम पर मंदिर समिति आरती कराने की बात कह रही है तो भव्यता के सुझाव उन्हें दिए जाएं, आरती वे ही करेंगे। शनिवार को तीर्थ पुरोहितों ने लगातार दूसरे दिन भी विरोध करते हुए शिप्रा नदी में उतर कर जल सत्याग्रह किया।

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मंदिर समिति का पक्ष और पहल

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने गुरुवार शाम रामघाट के समीप शिप्रा आरती की शुरुआत की थी। मंदिर समिति द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान के 21 विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरती की थी। प्रशासन के इस निर्णय को तीर्थ परंपरा के परिष्कार तथा वैदिक शिक्षा को सम्मान दिलाने का माध्यम माना जा रहा है। दरअसल, उज्जैन में श्री महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, श्री महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण व शोध संस्थान तथा श्री महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के माध्यम से देशभर में बटुक वेदाध्ययन कर रहे हैं। वे वेद, ज्योतिष, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा की डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर समिति का मानना है कि वेदाध्ययन कर चुके बटुक तीर्थ तथा मंदिरों की धार्मिक व्यवस्था को और भी अधिक शास्त्र सम्मत व सशक्त बना सकते हैं। आरती शुरू करने के पीछे यही सोच है। मंदिर समिति का कहना है कि तीर्थ पुरोहितों से जुड़ी परंपरा में वे किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।