बुलंद सोच, उज्जैन।

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकली। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर तथा सुमा हाथी पर मनमहेश रूप में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। सावन की रिमझिम फुहारों के बीच लोक नृत्य की थीम पर निकली सवारी में लोकसंस्कृति के रंग भी नजर आए।
46 साल बाद बदला हाथी
बीते दस सालों से सवारी में शामिल होने वाले श्यामू हाथी के बीमार होने पर इस बार मादा हाथी सुमा को सवारी में शामिल किया गया। मादा हाथी सुमा पहली बार सवारी में शामिल हुई और शांत, किन्तु आह्लादित भाव से इठलाते हुए चल रही थी। पशु चिकित्सा व वन विभाग ने ऐन वक्त पर सुमा को सवारी में शामिल करने का निर्णय लिया। श्यामू हाथी के मालिक सरमन गिरि महाराज को इस निर्णय की खबर नहीं मिल पाई थी। सोमवार सुबह वे श्यामू को लेकर मंदिर पहुंचे, जहां वन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सुमा के शामिल होने की जानकारी दी। इसके बाद सरमन और श्यामू दोनों मायूस होकर घर लौट गए। इस घटना के साथ ही रामू-श्यामू हाथी परिवार की 46 साल से चली आ रही भगवान महाकाल की सेवा का सफर समाप्त हो गया।
पूजन और जलाभिषेक
दोपहर 3:30 बजे मंदिर के सभा मंडप में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने भगवान महाकाल के रजत मुखारविंदों का पूजन किया। पूजन के पश्चात सवारी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। परंपरागत मार्गों से सवारी शाम करीब 5:10 बजे शिप्रा तट पहुंची। शिप्रा तट पर पुजारियों ने भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की और पूजन पश्चात जलाभिषेक किया। निर्धारित मार्गों से होते हुए सवारी शाम 7 बजे मंदिर वापस पहुंची।
सवारी के मुख्य आकर्षण
सवारी मार्ग 5 किलोमीटर लंबा था। भक्ति का उल्लास 4 घंटे तक छाया रहा। सवारी में 15 से अधिक दल शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1200 जवानों को तैनात किया गया था।
सावन स्पेशल ट्रेनें
उज्जैन-भोपाल मार्ग पर 8 सितंबर तक 3 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें दौड़ेंगी।

