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2026-07-29

राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त कराया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा कांग्रेस में होने के बावजूद दलगत राजनीति और विचारधारा की सीमाओं से परे जाकर जनहित और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते रहे हैं। राष्ट्रीय हित उनके लिए सर्वोपरि रहा है।

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हालिया मामला नई दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के धरना-प्रदर्शन का है, जिसे समाधान की ओर ले जाने में तन्खा की अहम भूमिका सामने आई है। जब असामाजिक तत्व धरने पर कब्जा करके आंतरिक सुरक्षा में व्यवधान डालने का प्रयास कर रहे थे, तब तन्खा ने ही 26 दिनों से धरने पर बैठे सोनम वांगचुक को अनशन तोड़ने के लिए मनाया। इस पहल से सरकार के साथ बातचीत का रास्ता साफ हुआ।

तन्खा ने समय रहते प्रयास करके वांगचुक पर अराजकता का दाग लगने से बचाया, साथ ही छात्रों को भी आश्वस्त किया कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। इस प्रक्रिया की शुरुआत 17 जुलाई को हुई, जब तन्खा समाधान की तलाश में सोनम की पत्नी गीतांजलि अंगमो के साथ जंतर मंतर पहुंचे। उन्होंने 20वें दिन धरना समाप्त करने के लिए मनाने की कोशिश की, हालांकि तब वांगचुक नहीं माने।

इसी रात पुलिस ने जबरन वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया। इसके बाद से ही तन्खा की भूमिका बढ़ी और उन्होंने सीनियर एडवोकेट के नाते पैरवी करके हाईकोर्ट के आदेश से वांगचुक को वेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया। 19 जुलाई की रात सांसदों का पत्र लेकर वह उनसे मिले और उन्हें सहमति के लिए मना लिया। तन्खा ने बताया कि सुबह पता चला कि सोनम ने धरना समाप्त कर दिया।

कश्मीरी पंडितों के मानवाधिकार का मुद्दा हो या जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का मसला, तन्खा ने जनहित व राष्ट्रहित को ही महत्व दिया है। एक कश्मीरी पंडित और सीनियर एडवोकेट होने के नाते तन्खा का रुख अपनी पार्टी (कांग्रेस) की लाइन से हटकर कश्मीरी विस्थापितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता का उदाहरण रहा है।

वर्ष 2022 में भी विवेक तन्खा ने राज्यसभा में ऐतिहासिक प्राइवेट मेंबर बिल- ‘कश्मीरी पंडित (पुनर्प्राप्ति, बहाली, पुनर्वास और पुनर्गठन) विधेयक, 2022’ पेश किया था। इसका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें अपनी मातृभूमि पर ससम्मान वापस बसाना था। कांग्रेस दल का हिस्सा होने के बावजूद कश्मीर और राष्ट्रहित के मुद्दों पर सदैव देश की संप्रभुता और कश्मीरी विस्थापितों के मानवाधिकारों का खुलकर समर्थन करना तन्खा को राजनेताओं की अलग श्रेणी में स्थान देता है।

पांच अगस्त 2019 को जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किया, तब राज्यसभा में उन्होंने सरकार के कदम पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा था कि क्या अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीरी पंडित अपने घरों को लौट पाएंगे। दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को वैध ठहराया, तब विवेक तन्खा ने राज्यसभा में स्वीकार किया कि अनुच्छेद 370 हमेशा से ही संविधान का एक अस्थायी प्रविधान था।

तन्खा ने पर्दे के पीछे रहकर सबसे मुख्य और क्राइसिस मैनेजर की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “जब मैं जनहित का काम करता हूं, तो पार्टी के बारे में नहीं सोचता। जो राष्ट्रहित में है, मैं उसके साथ खड़ा हो जाता हूं। किसी को पसंद हो तो ठीक, वरना मुझे कोई दिक्कत नहीं। राष्ट्र मेरे लिए सर्वोपरि है।”