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2026-10-17

बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 12 अधिकारी STF के रडार पर

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल के 12 पुलिस अधिकारियों व अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जो अब STF की रडार पर हैं।

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रैकेट का उद्भव और संदिग्ध कार्यप्रणाली

बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाने का यह खेल साल 2021 में ग्वालियर के डबरा से शुरू हुआ था। सत्रह फर्जी पासपोर्ट पर एक ही गवाह, एक ही पता और एक ही मोबाइल नंबर होने के बावजूद पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी, जिससे पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उस समय ग्वालियर के डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला व थाना पर पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल के इंचार्ज प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर थे। STF जल्द ही इन दोनों को तलब कर पूछताछ करेगी।

विदेश मंत्रालय की चेतावनी और PHQ की निष्क्रियता

विदेश मंत्रालय ने 2023 में ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) को रिपोर्ट भेजकर फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के प्रति आगाह किया था। इसके बावजूद पीएचक्यू से कोई ठोस संदेश जारी नहीं किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि आज इन 70 बांग्लादेशियों के फर्जी दस्तावेज व पासपोर्ट ने पूरे देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

फर्जी पासपोर्ट की संभावित संख्या

प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट की संख्या 100 के पार जाने की आशंका है, क्योंकि STF को कुछ और संदिग्ध पासपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही, साल 2021-22 और उसके बाद के दो साल में डबरा सहित इन शहरों से जितने पासपोर्ट बने हैं, उनमें कई संदिग्ध की श्रेणी में आ रहे हैं।

रैकेट के मुख्य केंद्र और सत्यापन में धांधली

रैकेट का मुख्य नेटवर्क ग्वालियर और भोपाल में सक्रिय था। भोपाल के गोविंदपुरा के एक ही पते पर 40 फर्जी पासपोर्ट के आवेदन तैयार कर अलग-अलग जिलों के पासपोर्ट सेल में वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाते रहे और पासपोर्ट बनते रहे। इसी तरह, दूसरा सबसे बड़ा गढ़ ग्वालियर का डबरा रहा था, जहां से एक ही पते पर 17 बांग्लादेशियों के भारतीय दस्तावेज बने और पासपोर्ट तैयार हुए। स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में खुलासा हुआ है कि संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन वेरिफिकेशन के लिए डबरा थाने पहुंचने से पहले ही वहां फोन आ जाता था। थाने में कहा जाता था कि आवेदन अर्जेंट है, इसे जल्दी क्लियर करके निकालो। एक फोन कॉल पर पासपोर्ट आनन-फानन में वैरिफिकेशन कर निकाल दिया जाता था।

गिरफ्तारियां और मास्टरमाइंड का खुलासा

बांग्लादेशियों के मध्य प्रदेश से फर्जी पासपोर्ट कांड में अब तक मास्टरमाइंड रियाल चौधरी, जाय चौधरी बरुआ, महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़ा गया प्रियान राय और साउथ दिल्ली से पकड़ा गया विप्लव अधिकारी गिरफ्तार किए गए हैं। STF की अलग-अलग टीमें 08 अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। STF और पुलिस की पूछताछ में रैकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रियाल चौधरी के खुद के 4 पासपोर्ट बने हैं और चारों में ही फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे। उसने डबरा के दो स्थानीय दलालों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। STF एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार, रियाल से पूछताछ के आधार पर 5 अलग-अलग टीमें गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी के लिए भेजी गई हैं।

तत्कालीन अधिकारियों पर जांच का घेरा

जिस अवधि (2021) में डबरा से ये फर्जी पासपोर्ट वेरीफाई हुए, उस दौरान विनायक शुक्ला (वर्तमान में दतिया में DSP) डबरा थाना प्रभारी थे, जबकि पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल का जिम्मा प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर के पास था। कुछ समय के लिए सुरेंद्र सिंह भी थाना प्रभारी रहे थे। STF यह पता लगा रही है कि थाने में पहले से फोन कौन करता था और उसे आवेदनों की गुप्त जानकारी कैसे मिलती थी।

बौद्ध विहार का संदिग्ध कनेक्शन

बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनाने के मामले में खुलासा हुआ है कि डबरा के जिस बुद्ध विहार के पते से 17 बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट बने, वहां के भिक्षु के ही तीन अलग-अलग नाम सामने आए हैं। आधार कार्ड में उनका नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय और मठ की दीवार पर रांघप्रिय महाथेरो लिखा है। आधार में रामेश्वर जाटव के पिता का नाम नारायण जाटव और पता दतिया का है। वहीं वोटर आईडी में उनका नाम भंते संघप्रिय और पिता का नाम नारायण दर्ज है। इस पर उनका कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही बौद्ध धर्म अपनाया है और धर्म अपनाने के बाद नाम संघप्रिय रखा गया। उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा कि नया नाम मिलने पर क्या दस्तावेज भी बदल जाते हैं। STF की जांच में एक और गंभीर बात सामने आई है कि बुद्ध मठों में आने-जाने वाले लोगों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला है। मठ में कौन आया, कहां से आया, कितने दिन रुका और कब चला गया, इसका हिसाब नहीं है। संदेह के आधार पर मठों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

STF की व्यापक कार्रवाई

इस मामले में एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट मामले में उनकी पांच टीमें मध्यप्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं। साथ ही, पांच साल में फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज बनाने से लेकर पासपोर्ट वेरिफिकेशन तक कई विभागों और पुलिस थानों तक फाइलें पहुंचीं। इनसे जुड़े पुलिस अफसर, पुलिसकर्मी व अन्य विभाग के कर्मचारियों की सूची बनाई गई है। सभी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी। कई आरोपियों के दो से तीन दस्तावेज भी मिले हैं।