बुलंद सोच, भोपाल।
भोपाल के राताताल के रोजीवे गांव में 15 एकड़ जमीन की समतलीकरण परमिशन लेकर डेढ़ सौ डंपर कोपरा निकालने के मामले की जांच पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खनिज इंस्पेक्टर सुचि माथुर की रिपोर्ट से खनिज माफिया शेखर पवार और शैलेंद्र भदौरिया के नाम गायब कर दिए गए हैं, जबकि जमीन मालिक किसान हरिचरण पर केस बनाया गया है।
किसान हरिचरण पर 40 लाख 40 हजार रुपये की रॉयल्टी जमा कराने की पेनल्टी लगाई गई है।
इस मामले में खदान से दो पोकलेन मशीनें जब्त की गई हैं, लेकिन 12 डंपरों को छोड़ दिया गया है।
जिला खनिज अधिकारी मेहताब सिंह रावत ने बताया कि खनिज इंस्पेक्टर ने डंपरों को क्यों छोड़ा है, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं दी गई है। उनका यह भी कहना है कि जब डंपरों को जब्त नहीं किया गया है, तो पोकलेन मशीनें भी जब्त नहीं की जानी चाहिए।
कलेक्टर का बचाव और तीसरी जांच
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का कहना है कि जिले में खदानों की संख्या सीमित है, ऐसे में आसपास के क्षेत्रों के किसान अस्थाई परमिशन लेकर सरकार को रॉयल्टी के रूप में राजस्व देते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर इन पर सख्ती की जाएगी, तो निर्माण के लिए खनिज की उपलब्धता मुश्किल हो जाएगी और दाम बढ़ने से कम बजट का मकान बनाने वाले लोगों को निर्माण करना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि, इसके पहले कलेक्टर ने इस मामले की तीसरी बार जांच कराने की बात कही थी, लेकिन खनिज अधिकारी ने कलेक्टर के लिखित में आदेश मिलने पर ही जांच कराने की बात कही।
पूर्व में भी बचाया गया था एक आरोपी
इसके पहले जिला खनिज अधिकारी ने अचारपुरा के डोबरा रोड स्थित कुठार की चंदेरी झील में जल गंगा संवर्धन के नाम पर हुए अवैध उत्खनन मामले में भी पूर्व जिला खनिज अधिकारी एलएम गोयल के बेटे शुभम गोयल शैंकी को बचा लिया था।
अधिकारियों ने मौके से डंपर और मशीनें नहीं मिलने पर शुभम गोयल शैंकी को क्लीनचिट दे दी थी।
जिला खनिज अधिकारी का कहना है कि कार्रवाई खनिज इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर ही की जाती है और पेश की गई रिपोर्ट में अवैध खनन या किसी व्यक्ति का नाम नहीं दिया गया था।
