बुलंद सोच, भोपाल।

गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल के दंत रोग विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मुख कैंसर स्क्रीनिंग डिवाइस और मोबाइल ऐप विकसित किया है।
भारत सरकार ने इस तकनीक को पेटेंट प्रदान किया है। यह मध्य प्रदेश में अपनी तरह की पहली तकनीक है।
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.5 लाख नए मुख कैंसर के मरीज सामने आते हैं। मध्य प्रदेश में पुरुषों में यह दर 25 प्रति लाख है। भोपाल भी उन शहरों में शामिल है जहां मुख कैंसर के मरीजों की संख्या अधिक है।
अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुँचते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए यह तकनीक विकसित की गई है ताकि गांव-दूरदराज में भी मुख यानी ओरल कैंसर की जांच आसानी से हो सके।
दंत रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनुज भार्गव ने बताया कि उनका उद्देश्य कैंसर को बिल्कुल शुरुआती चरण में पहचानना है, जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने एआई की शक्ति को अंतिम गांव तक पहुंचाने वाले स्वास्थ्यकर्मी के हाथों में देने का प्रयास व्यक्त किया।
उन्होंने इस कार्य में डॉ. ऋचा शर्मा और डॉ. अनिमेष बरोड़िया के योगदान की सराहना की। महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. कविता एन सिंह के मार्गदर्शन में यह नवाचार संभव हुआ।
तकनीक की विशेषताएं
गांधी मेडिकल कॉलेज की टीम ने इस तकनीक के तहत दो मुख्य घटक तैयार किए हैं, जिनमें एआई-आधारित स्क्रीनिंग डिवाइस और मुख आरोग्य ऐप शामिल हैं।
एआई-आधारित स्क्रीनिंग डिवाइस मुंह के अंदर की तस्वीर लेकर एआई की मदद से तुरंत बता देता है कि कोई संदिग्ध लक्षण मौजूद है या नहीं।
मुख आरोग्य ऐप को विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों के लिए बनाया गया है। इस ऐप के जरिए वे गांव में ही लोगों की स्क्रीनिंग कर सकेंगे और संदिग्ध मरीजों को तुरंत बड़े अस्पताल रेफर कर सकेंगे।
इससे कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो सकेगी, जिससे इलाज आसान, कम खर्चीला और अधिक असरदार होता है।

