बुलंद सोच, भोपाल।

राजधानी भोपाल में होने वाले विकास कार्यों में लगातार इंजीनियरिंग के नायाब नमूने देखने को मिल रहे हैं, जिनकी वजह से इंजीनियरिंग और बेतरतीब निर्माण कार्यों को लेकर सवाल होने लगे हैं।
शहर के अवधपुरी क्षेत्र के विद्यासागर तिराहे पर बने सार्वजनिक यूरिनल का मामला सामने आया है। यहां लाखों रुपये की लागत से निर्मित यूरिनल के चारों ओर तीन से चार फीट ऊंची दीवार खड़ी कर दी गई है।
नतीजतन, उसके भीतर जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे निर्माण पर खर्च की गई राशि के बावजूद यह यूरिनल बेकार हो गया है। इससे एक बार फिर राजधानी में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विद्यासागर तिराहे पर दो सार्वजनिक यूरिनल बनाए गए थे और दोनों के प्रवेश मार्ग अलग-अलग हैं। इनमें से एक यूरिनल के रास्ते पर कुछ दिनों से दीवार खड़ी दिखाई दे रही है।
क्षेत्रवासियों को यह जानकारी नहीं है कि यह दीवार कब और किसके निर्देश पर बनाई गई। उनका कहना है कि रास्ता बंद होने के कारण अब यह यूरिनल पूरी तरह अनुपयोगी हो गया है। यदि प्रवेश मार्ग ही बंद करना था तो निर्माण पर लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या था।
भोपाल में इंजीनियरिंग की खामियों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा 90 डिग्री एंगल वाले ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज की हुई थी। इस ओवरब्रिज में रेलवे लाइन पार करने के लिए लगभग 90 डिग्री का तीखा मोड़ बनाया गया था।
विशेषज्ञों और नागरिकों ने इसे यातायात की दृष्टि से खतरनाक बताया था। इसके बाद ओवरब्रिज के डिजाइन में बदलाव करने का निर्णय लिया गया।
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ऐशबाग क्षेत्र में भी कुछ समय पहले निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आई थी। यहां नगर निगम द्वारा सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन बाद में उसके सामने रेलवे ने दीवार खड़ी कर दी थी, जिससे शौचालय तक जाने का रास्ता ही बंद हो गया था।
नगर निगम के एसबीएम शाखा के अधीक्षण यंत्री संतोष गुप्ता ने बताया कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि यूरिनल के चारों ओर दीवार खड़ी कर दी गई है, तो वह उपयोग लायक ही नहीं बचेगा। उन्होंने इस बारे में पता करवाने की बात कही।

