बुलंद सोच, भोपाल।
भोपाल में मेट्रो रेल ब्लू लाइन एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के कारण शहर की हरियाली प्रभावित हुई है। ऐतिहासिक मिंटो हॉल (पुरानी विधानसभा) के सामने दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया था। अब इन्हीं पेड़ों के ठूंठों पर मंगलवार को गमले रखकर हरियाली सजाने की कवायद शुरू की गई है।
यह कवायद ब्रिक्स सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के सामने महज एक दिखावा साबित होगी। आज भोपाल में ब्रिक्स देशों का मंथन हो रहा है, जिसमें लंदन से वाग्देवी प्रतिमा की वापसी पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
मिंटो हॉल के सामने लगे ये पेड़ वर्षों से शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ व्यस्त बस स्टॉप पर यात्रियों के लिए प्राकृतिक छांव का सहारा भी थे। गर्मी के दिनों में लोग इन पेड़ों के नीचे खड़े होकर बसों का इंतजार करते थे।
पेड़ों की कटाई के बाद अब उस स्थान पर धूप, धूल और कंक्रीट का माहौल नजर आ रहा है।
पर्यावरण प्रेमी उमाशंकर तिवारी ने कहा कि मेट्रो जैसी आधुनिक सुविधा आवश्यक है, लेकिन विकास के नाम पर पुराने पेड़ों को हटाने के बाद उनकी भरपाई केवल गमले रखकर नहीं की जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों में तैयार हुए पेड़ों की जगह नए पेड़ कब और कहां लगाए जाएंगे।
मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण के लिए पेड़ों को हटाना आवश्यक था और इसके लिए सभी वैधानिक अनुमतियां प्राप्त की गई थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए पुन: पौधारोपण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी को दी गई है।
पर्यावरणविद राशिद नूर खान ने ऐतिहासिक इमारतों और शहर के प्रमुख मार्गों से पुराने पेड़ों के खत्म होने को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि हरियाली केवल सजावट नहीं, बल्कि शहर के पर्यावरण संतुलन का आधार है। उन्होंने आगे कहा कि मेट्रो के नाम पर पेड़ों की कटाई और बाद में गमलों से हरियाली दिखाने की कोशिश ने भोपाल की ‘ग्रीन सिटी’ पहचान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

