BREAKING NEWS
2026-08-06

बड़ा तालाब संरक्षण मामले में एनजीटी ने भारत भवन ट्रस्ट को नोटिस जारी किया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

शहर की जीवनरेखा और रामसर साइट बड़ा तालाब के संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरणीय उल्लंघनों के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भारत भवन ट्रस्ट को मामले में पक्षकार बनाया है।

Advertisement

एनजीटी ने ट्रस्ट को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने माना है कि मामले के प्रभावी समाधान के लिए ट्रस्ट की भूमिका स्पष्ट होना आवश्यक है।

यह कार्रवाई भोज वेटलैंड में कथित पर्यावरणीय नुकसान को लेकर दायर याचिका पर की गई है। पर्यावरणविद और याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए सेंट्रल जोन बेंच ने भारत भवन ट्रस्ट को प्रतिवादी क्रमांक-9 के रूप में शामिल करने की अनुमति दी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2002 से रामसर साइट घोषित भोज वेटलैंड के संरक्षित 50 मीटर बफर जोन में नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

इन गतिविधियों में प्राकृतिक चट्टानों पर ब्लास्टिंग, अवैध खुदाई, स्टोन क्रशर का संचालन, पेड़ों की कटाई और भूमि विकास जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

याचिका में बताया गया है कि इन गतिविधियों से बड़ी झील के जलग्रहण क्षेत्र, भू-जल रिचार्ज क्षमता, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को नुकसान पहुंच रहा है। यदि इन पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो वेटलैंड को अपूरणीय क्षति होने की आशंका है।

याचिका में मध्यप्रदेश पर्यावरण विभाग के 16 मार्च 2022 के आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें भोज वेटलैंड के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर की सीमा के भीतर निर्माण और पर्यावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि भारत भवन ट्रस्ट को पक्षकार बनाए बिना प्रभावी आदेश जारी नहीं किए जा सकते, क्योंकि ट्रस्ट प्रशासनिक नियंत्रण और पर्यवेक्षण से जुड़ा पक्ष है। एनजीटी ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए ट्रस्ट को शामिल किया और संशोधित पक्षकार सूची पेश करने के निर्देश दिए।

बड़ी झील से भोपाल के लगभग 10 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध होता है। ऐसे में रामसर साइट की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने पर्यावरण संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

एनजीटी ने अभी आरोपों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है, लेकिन संबंधित पक्षों से जवाब तलब कर मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।