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हाई कोर्ट ने नरसिंहपुर पुलिस सिपाही से 16 साल बाद वेतन वसूली आदेश निरस्त किया

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

नरसिंहपुर पुलिस के एक सिपाही को लगभग 16 वर्ष तक निर्धारित वेतन और वेतनवृद्धि देने के पश्चात विभाग ने वेतन निर्धारण में त्रुटि का हवाला देते हुए अधिक भुगतान की राशि वसूलने का आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट ने नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी इस आदेश को निरस्त कर दिया है।

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न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने नरसिंहपुर निवासी हीरालाल यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वसूली से कर्मचारी के वेतन में कमी आती है और उसके विरुद्ध प्रतिकूल नागरिक परिणाम होते हैं, इसलिए ऐसा कोई भी आदेश जारी करने से पूर्व उसे सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता से कोई राशि वसूल की गई है, तो उसे वापस किया जाए।

याचिकाकर्ता हीरालाल यादव को एक आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के कारण 20 अक्टूबर 1998 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

इसके बाद, आपराधिक अपील में उन्हें 14 दिसंबर 2004 को बरी कर दिया गया था।

परिणामस्वरूप, 27 जुलाई 2005 को उन्हें सिपाही के पद पर पुनः सेवा में बहाल किया गया।

बहाली के उपरांत एक विभागीय जांच की गई, जिसमें उन्हें संचयी प्रभाव से एक वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी गई।

साथ ही, सेवा से बाहर रहने की अवधि को ‘नो वर्क, नो पे’ माना गया और उन्हें काल्पनिक लाभ देने के निर्देश जारी किए गए।

विभाग ने 1 जनवरी 2006 को हीरालाल यादव का वेतन 7070 रुपये और ग्रेड-पे 1900 रुपये निर्धारित किया था।

इसके बाद उन्हें नियमित रूप से वेतनवृद्धि और अन्य लाभ प्राप्त होते रहे।

लगभग 16 वर्ष बाद, 1 जनवरी 2022 को विभाग को ज्ञात हुआ कि उन्हें अधिक वेतन का भुगतान हो रहा है।

इसके पश्चात, वेतन और ग्रेड-पे में सुधार करते हुए कथित अधिक भुगतान की राशि वसूलने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह (2015)’ के निर्णय का उल्लेख किया गया, जिसमें पांच वर्ष से अधिक पुरानी अवधि में हुए अधिक भुगतान की वसूली को कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में कानूनन अस्वीकार्य माना गया है।

हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि वसूली आदेश जारी करने से पूर्व याचिकाकर्ता को सुनवाई का कोई अवसर प्रदान नहीं किया गया था।

हाई कोर्ट ने नरसिंहपुर एसपी द्वारा 27 मार्च 2023 को जारी वसूली आदेश को पूर्णतः निरस्त कर दिया।

इन निर्देशों के साथ याचिका का निराकरण कर दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह बघेल ने पक्ष रखा।