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2026-07-29

भोपाल रेल मंडल में करोड़ों की परियोजनाएं समय-सीमा पार करने के बाद भी अधूरी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

रेलवे विकास को लेकर लगातार नई योजनाओं और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बावजूद, भोपाल रेल मंडल की तस्वीर इन दावों से भिन्न दिखाई देती है। करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा पार करने के बावजूद अधूरी हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना की गति धीमी है, वहीं वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन में अधूरी पिट लाइन बाधा बनी हुई है। नया रेलवे कंट्रोल रूम तैयार होने के बावजूद अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि आधुनिक मल्टी-डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर उद्घाटन का इंतजार कर रहा है।

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निशातपुरा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन

रेलवे से जुड़े जनहित के मुद्दों को नईदुनिया ने समय-समय पर प्रमुखता से उठाया है, जिसका असर भी देखने को मिला है। नईदुनिया की लगातार मुहिम के बाद आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निशातपुरा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन कर रहे हैं। लंबे समय से तैयार होने के बावजूद यह स्टेशन लोकार्पण और ट्रेनों के ठहराव की मंजूरी का इंतजार कर रहा था। भोपाल शहर के निकट स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन पूरी तरह तैयार था, जिसमें प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, वेटिंग हॉल और फुट ओवरब्रिज सहित सभी आवश्यक कार्य पूरे हो चुके थे। इस स्टेशन का नवीनीकरण और कार्य वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। रेलवे ने इसे भोपाल जंक्शन पर बढ़ते दबाव को कम करने और इंजन रिवर्सल की समस्या दूर करने के उद्देश्य से विकसित किया था। लगभग डेढ़ वर्ष से तैयार यह स्टेशन उद्घाटन और ट्रेनों के ठहराव का इंतजार कर रहा था। स्टेशन के शुरू होने के बाद यात्रियों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब यहां नियमित रूप से ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाएगा।

अमृत भारत स्टेशन योजना की स्थिति

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत भोपाल रेल मंडल के 15 रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी और इसे मई 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी अब तक केवल नर्मदापुरम और शाजापुर रेलवे स्टेशन का ही कार्य पूरा हो पाया है। लगभग 291.43 करोड़ रुपये की लागत से चल रही इस परियोजना की नई समय-सीमा अब मार्च 2026 तय की गई है। योजना के तहत स्टेशनों पर वातानुकूलित लॉबी, कवर पार्किंग, बेहतर पेयजल व्यवस्था, नए कार्यालय और व्यावसायिक दुकानें विकसित की जा रही हैं। निर्माण कार्य में देरी का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है। प्रगति की बात करें तो हरदा स्टेशन पर केवल 60 प्रतिशत कार्य, सांची स्टेशन पर 90 प्रतिशत तथा गंजबासौदा स्टेशन पर 85 प्रतिशत निर्माण पूरा हुआ है।

रानी कमलापति स्टेशन पर अधूरी पिट लाइन

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर बन रही नई पिट लाइन भी तय समय से काफी पीछे चल रही है। इसी वजह से यहां से नई वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत फिलहाल संभव नहीं हो सकी है। इस परियोजना की शुरुआत मई 2023 में हुई थी और इसे छह महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन दो वर्ष बाद भी लगभग 90 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ठेकेदार की धीमी कार्यशैली और निर्माण स्थल पर मजदूरों की कमी से काम प्रभावित हुआ है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा पिट लाइन को आधुनिक कैमटेक डिजाइन के अनुरूप अपग्रेड किया जा रहा है ताकि ट्रेनों की धुलाई और तकनीकी जांच अधिक प्रभावी ढंग से की जा सके। शुरुआत में इस परियोजना की लागत सात करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो अब बढ़कर लगभग 14 करोड़ रुपये हो गई है। वर्तमान में स्टेशन यार्ड में तीन पिट लाइनें संचालित हैं, जबकि लगभग 700 मीटर लंबी चौथी पिट लाइन का निर्माण अभी जारी है।

मल्टी-डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर

निशातपुरा रेलवे क्षेत्र में लगभग 23.21 करोड़ रुपये की लागत से बना मल्टी-डिसिप्लिनरी ट्रेनिंग सेंटर पूरी तरह तैयार होने के बावजूद अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इसे मार्च 2025 में चालू किया जाना था, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय नहीं होने के कारण यह अब भी बंद पड़ा है। लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण भवन और कमरों में धूल जमने लगी है। इस आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र में तकनीकी, सिग्नल, दूरसंचार, इंजीनियरिंग, लेखा, कार्मिक और भंडार विभागों के कर्मचारियों को एक ही परिसर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां वंदे भारत लोको सिमुलेटर, 80 बेड का हॉस्टल, कैंटीन, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, सभागार और चिकित्सा कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उपयोगकर्ता समिति भी उद्घाटन में हो रही देरी पर सवाल उठा चुकी है।

नया रेलवे कंट्रोल रूम

भोपाल रेल मंडल कार्यालय परिसर में लगभग छह करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया नया रेलवे कंट्रोल रूम पिछले छह महीने से पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इस भवन का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था और इसे 2024 में पूरा होना था। हालांकि निर्माण कार्य जुलाई 2025 में जाकर पूरा हुआ, यानी परियोजना लगभग दो वर्ष की देरी से पूरी हुई। अब पुराने कंट्रोल रूम से उपकरणों की शिफ्टिंग में लगातार विलंब हो रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों की संख्या बढ़ने के कारण तकनीकी अपग्रेड और सिस्टम शिफ्टिंग में अधिक समय लग रहा है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, यह भवन केवल कंट्रोल विभाग के लिए बनाया गया था, लेकिन अन्य विभागों को भी यहां स्थान देने की योजना संचालन व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

रेलवे अधिकारी का बयान

भोपाल रेल मंडल में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई परियोजनाओं का वर्षों तक अधूरा रहना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है, समय-सीमा लगातार आगे बढ़ रही है और इसका सीधा असर यात्रियों तथा रेलवे कर्मचारियों पर पड़ रहा है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि जिन परियोजनाओं की घोषणा हो चुकी है, उन्हें तय समय पर पूरा कर आम लोगों को उनका वास्तविक लाभ भी मिल सके। नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल ने कहा कि रेलवे विकास को लेकर भोपाल मंडल में कई अहम परियोजनाएं आकार ले रही हैं। ट्रेनिंग सेंटर, नई पिट लाइन, आधुनिक कंट्रोल रूम और स्टेशन रेनोवेशन जैसी योजनाएं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर शुरू की गई हैं। इनका काम बेहतर तरीके से किया जा रहा है। कुछ परियोजनाएं समय ले रही हैं, लेकिन इन्हें जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इनके पूरा होने से यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।