बुलंद सोच, भोपाल।
शहर की चरमराती व्यवस्था और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों का जिम्मेदार नगर निगम को बताया गया है। निगम अफसरों की बड़ी भूमिका आवासीय भूखंडों पर गैर-कानूनी तरीके से चल रहे व्यावसायिक कामकाज को वैध बनाने में है। शहर की हर गली-मोहल्ले में आवासीय जमीनों पर व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं, जिससे आम रहवासियों का सुकून छिन चुका है।
पड़ताल में सामने आई मिलीभगत
नवदुनिया की पड़ताल में सामने आया है कि नगर निगम के राजस्व विभाग के अफसरों ने 5 और 6 रुपये प्रति वर्ग फीट पर आवासीय भूखंडों पर ट्रेड लाइसेंस जारी किए हैं। गुमास्ता बिना मौके मुआयना के बना और बिल्डिंग परमिशन की जांच का सिर्फ दिखावा हुआ। कुल मिलाकर यह पूरा खेल नगर निगम के भवन अनुज्ञा शाखा, राजस्व और श्रम विभाग की साठगांठ से चल रहा है।
अरेरा कॉलोनी में स्थिति
मुख्यमंत्री के रविवार रात के बयान के बाद सोमवार को अरेरा कॉलोनी के व्यापारियों ने निश्चिंत होकर शोरूम खोले। हालांकि, नगर निगम के जोन कार्यालय के ठीक सामने एक दुकान पर ताला लटका मिला, जिस पर ननि के आदेशानुसार व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने का पोस्टर चिपका था।
जिम्मेदार विभाग और उनकी कार्यप्रणाली
अनुमति देने व जांच करने में तीन विभागों की अहम भूमिका रही है।
**भवन अनुज्ञा शाखा:** शहर की व्यवस्था बिगाड़ने में भवन अनुज्ञा के सिटी प्लानर, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और सब-इंजीनियरों की भूमिका बताई गई है। मध्य विधानसभा क्षेत्र के सिटी प्लानर और एक्जीक्यूटिव इंजीनियर दोनों का दायित्व वर्तमान में अनिल तटवाड़े के पास है। वर्तमान में पीयूष श्रीवास्तव सब इंजीनियर हैं, जिनके पहले मयंक शर्मा हुआ करते थे। इनका दायित्व है कि निर्माण के दौरान परमिशन के अनुरूप निर्माण हुआ है या नहीं और वहां क्या गतिविधियां संचालित हो रही हैं, नियम विरुद्ध निर्माण या कार्य हो रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। हालांकि, आरोप है कि जिम्मेदार अफसर नियम उल्लंघन पर कार्रवाई करने के बजाय जांच के नाम पर उगाही कर आंखें मूंदते आए हैं।
**राजस्व विभाग:** नगर निगम के राजस्व के अफसरों को वैधता से कोई सरोकार नहीं है। उनका एकमात्र मकसद टैक्स के नाम पर मोटी रकम वसूलना है। वर्ष 2017 में पूर्व निगम आयुक्त द्वारा नियमों में संशोधन के बाद मुख्य मार्गों पर 6 रुपये और अंदरूनी सड़कों पर 5 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से व्यावसायिक संपत्तिकर वसूलना शुरू किया गया। अरेरा कॉलोनी के व्यापारियों को इसी व्यावसायिक संपत्तिकर के आधार पर ट्रेड लाइसेंस मिले हैं। अफसरों को यह मालूम था कि आवासीय भूखंड है, फिर भी उनको ट्रेड लाइसेंस जारी किए गए। राजस्व बढ़ाने की इस अंधी दौड़ के कारण आज आम जनता और व्यापारी दोनों ही पिस रहे हैं।
**श्रम विभाग:** श्रम विभाग की दिक्कत यह है कि एक दिन में गुमास्ता जारी करना है, इसलिए जांच का कोई प्रविधान नहीं है; आवेदन करो गुमास्ता लो। वर्ष 2014 तक ननि द्वारा गुमास्ता जारी होता था, वर्ष 2015 से गुमास्ता श्रम विभाग द्वारा जारी होता है। अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंड पर एक-डेढ़ दशक पहले से व्यवसाय हो रहा है, तब ननि अफसरों ने आवासीय भूखंड पर गुमास्ता जारी किए थे। यह सिलसिला आज भी जारी है, लेकिन आवासीय भूखंड पर गुमास्ता जारी करवा रहे हैं। इस वजह से आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
भोपालवासियों का आक्रोश
भोपालवासी आवासीय कॉलोनियों में अवैध व्यवसाय पर भड़के हुए हैं और नेताओं को चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी दे रहे हैं।

