बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बदमाशों ने एक पुलिसकर्मी को निशाना बनाया। शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात करीब 12:30 बजे आरक्षक सुंदरम पटेल और मयंक ठाकुर ‘चार्ली’ (बाइक) से शाहपुरा थाना क्षेत्र के दानापानी इलाके में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान दानापानी शराब दुकान के पास एक इनोवा कार में दो युवक सरेआम शराब पीते हुए पाए गए।
पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें शराब पीने से रोका, तो वे बहस करने लगे। स्थिति को संभालने और कार्रवाई के लिए आरक्षक सुंदरम पटेल आरोपियों को थाने ले जाने के मकसद से उनकी इनोवा में बैठ गए। हालांकि, बदमाशों ने कार को थाने की तरफ मोड़ने के बजाय तेज रफ्तार में डीबी मॉल की दिशा में भगा दिया, जिससे सिपाही का अपहरण हो गया।
अपहरण करने के बाद आरोपियों ने चलती कार में सिपाही सुंदरम के साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने पुलिस या अधिकारियों को सूचना देने से रोकने के लिए सिपाही का मोबाइल छीनने का भी प्रयास किया और उसे जान से मारकर जंगल में ठिकाने लगाने की धमकी दी।
इस बीच, दूसरा आरक्षक मयंक बाइक से कार का लगातार पीछा कर रहा था। सिपाही सुंदरम ने सूझबूझ दिखाते हुए कार से ही अपनी लाइव लोकेशन टीआई को भेज दी। गणेश मंदिर होते हुए जब इनोवा डीबी मॉल और जीजी फ्लाईओवर के पास पहुंची, तो वहां ट्रैफिक और पुलिस की घेराबंदी देखकर बदमाशों को अपनी गाड़ी धीमी करनी पड़ी। इसी मौके का फायदा उठाकर सिपाही सुंदरम गेट खोलकर नीचे कूद गया, जिसके बाद बदमाश वहां से फरार हो गए।
आरोपियों की गिरफ्तारी और पहचान
वारदात के बाद शाहपुरा पुलिस ने इनोवा कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की और रविवार को दोनों को दबोच लिया। पड़ताल में सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल की गई इनोवा कार एक सेवानिवृत्त अधिकारी की है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गंजबासौदा निवासी भूपेंद्र शर्मा (हाल निवासी कोलार) और अमराई, बागसेवनिया निवासी ऋषि नामदेव के रूप में हुई है। दोनों पेशे से निजी वाहन चालक (ड्राइवर) हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी भूपेंद्र शर्मा का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ विदिशा के गंजबासौदा में पहले से ही हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, शासकीय कार्य में बाधा डालने और गंभीर मारपीट की धाराओं के तहत केस दर्ज कर इनोवा जब्त कर ली है।
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है। इन गंभीर धाराओं में आरोपियों को 10 साल तक की सजा हो सकती है।

