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2026-08-14

इंदौर आईटी पार्क फ्लाईओवर निर्माण: बदहाल वैकल्पिक मार्ग पर गहरे गड्ढे, 70 हजार वाहन चालक प्रभावित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में आईटी पार्क फ्लाईओवर के धीमे निर्माण के कारण लगभग 60 से 70 हजार वाहन चालकों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण के लिए बनाया गया वैकल्पिक मार्ग बदहाल स्थिति में है, जिस पर पांच से छह इंच तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। बारिश के कारण इस मार्ग पर वाहन चालकों की समस्या और बढ़ गई है। निर्माण स्थल के आसपास दोनों ओर की जर्जर सड़कों पर वाहन चालकों को गड्ढों के बीच से निकलना पड़ता है। तीन इमली से आईटी पार्क जाने वाले मार्ग पर जगह-जगह आधा-आधा फीट गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहनों को बचाकर निकालना एक चुनौती बन गया है। अचानक गड्ढे सामने आने पर वाहन चालक संतुलन खो देते हैं। बारिश में गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

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निर्माण की धीमी गति और बाधाएं

800 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर का निर्माण 60 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है, लेकिन लगभग दो साल में इसका केवल 50 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। निर्माण के दौरान यातायात डायवर्ट करने से पहले वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त किया जाना था, किंतु जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बारिश के बाद वैकल्पिक मार्ग की हालत और खराब हो गई है। फ्लाईओवर निर्माण स्थल पर सबसे बड़ी बाधा चौराहे से गुजर रही 10 इंच की मुख्य गैस पाइपलाइन है। इस पाइपलाइन को शिफ्ट करने में कई महीने लग चुके हैं, जबकि इसका कुछ हिस्सा अभी भी हटाया जाना बाकी है। निर्माण एजेंसी का कहना है कि पाइपलाइन के ऊपर पक्का निर्माण करने से भविष्य में रखरखाव के दौरान परेशानी होगी, जिसके कारण गैस पाइपलाइन वाले हिस्से में स्थायी सड़क नहीं बनाई जा रही है।

यातायात व्यवस्था पर असर

पिछले दो साल से शाम के समय चौराहे और आसपास के मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। दिनभर आईटी पार्क की ओर जाने वाले इस मार्ग पर वाहनों का दबाव अधिक रहता है। यातायात को नियंत्रित करने के लिए चार-पांच यातायात जवानों को तैनात करना पड़ रहा है, इसके बावजूद दिनभर यातायात प्रभावित रहता है। खराब सड़क पर कई बार वाहन आमने-सामने फंस जाते हैं, जिससे यातायात पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। विभाग ने बरसात से पहले सड़क की मरम्मत कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक स्थायी सुधार नहीं हुआ है। एजेंसी ने गड्ढों में गिट्टी डालकर खानापूर्ति की है, जो वर्षा होते ही बह जाती है और गड्ढे फिर से उभर आते हैं।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना

फ्लाईओवर का भूमिपूजन मार्च 2024 में हुआ था और लगभग तीन महीने बाद इसका निर्माण शुरू किया गया। शुरुआत में बाधक पेड़ों को हटाया गया, जिसमें रिंग रोड के ग्रीन बेल्ट से भी बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए। फिलहाल फ्लाईओवर के पिलर खड़े किए जा चुके हैं और उन पर पियर कैप का काम चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह काम अगले दो-तीन महीने में पूरा होगा। इसके बाद गर्डर लॉन्च किए जाएंगे और सितंबर से गर्डर बिछाने की योजना है।

अधिकारियों के बयान

एमपीआरडीसी के डिवीजनल मैनेजर गगन भाभर ने बताया कि पालदा से आईटी पार्क मार्ग पर गैस पाइपलाइन होने के कारण संभलकर काम करना पड़ता है। हालांकि, एजेंसी को लगातार मार्ग की मरम्मत के लिए निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि रात में यातायात का दबाव कम रहता है, उस दौरान एजेंसी गड्ढों को भरने और सड़क की मरम्मत का काम करेगी। विधायक मधु वर्मा ने कहा कि आईटी पार्क फ्लाईओवर के कारण क्षेत्र की यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। मार्ग व्यवस्थित नहीं होने से वाहनों की कतारें लगती हैं। उन्होंने बताया कि सोयाबीन अनुसंधान केंद्र से राजीव गांधी चौराहे की सड़क ठीक हो चुकी है और इन दिनों एमपीआरडीसी तथा एजेंसी को पालदा से आईटी पार्क मार्ग की मरम्मत के लिए कहा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक पंद्रह दिन में निर्माण कार्य की समीक्षा की जाती है।