बुलंद सोच, बेंगलुरु।
बंगलूरू स्थित मरलिनहॉक एयरोस्पेस ने बोइंग डिफेंस इंडिया के साथ एक समझौता किया है। इस समझौते का उद्देश्य देश के सैन्य जहाजों और विमानों की शक्ति को बढ़ाना है। इसके तहत रक्षा उपकरणों की देखभाल अब देश के भीतर ही संभव हो सकेगी। यह पहल भारतीय रक्षा बलों को सीधा लाभ पहुंचाएगी, जिससे उपकरणों की खराबी दूर करने में लगने वाला समय कम होगा। पूर्व में मरम्मत के लिए उपकरणों को विदेश भेजना पड़ता था, जो अब भारत में ही आसानी से हो सकेगा। इससे भारतीय नौसेना के विमान उड़ान भरने के लिए सदैव तैयार रहेंगे और देश का रक्षा ढांचा भी मजबूत बनेगा।
P-8I बेड़े को लाभ
इस योजना के अंतर्गत मरलिनहॉक कंपनी अपने बंगलूरू स्थित सर्विस सेंटर का उपयोग करेगी। यह केंद्र विशेष रूप से एल3हैरिस वेस्टकैम (L3Harris WESCAM) द्वारा प्रमाणित है। केंद्र में आधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड (EO/IR) सिस्टम की मरम्मत और रखरखाव की पूरी सुविधा उपलब्ध होगी।
समझौते के प्रमुख बिंदु
इस समझौते के पांच प्रमुख बिंदु हैं:
* मरम्मत भारत में: आधुनिक कैमरों और सेंसर की सर्विसिंग अब बंगलूरू में होगी।
* समय की बचत: उपकरणों को विदेश भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
* नौसेना को समर्थन: P-8I समुद्री निगरानी विमानों को निर्बाध सेवा प्राप्त होगी।
* प्रमाणित टीम: बंगलूरू केंद्र में पूरी तरह प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात हैं।
* विश्वस्तरीय केंद्र: यह पहल भारत को मरम्मत और रखरखाव (MRO) का एक बड़ा वैश्विक केंद्र बनाएगी।
अधिकारियों के बयान
बोइंग डिफेंस इंडिया के प्रमुख निखिल जोशी ने इस समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का P-8I विमान हिंद महासागर की सुरक्षा का मुख्य आधार है। जोशी ने मरलिनहॉक के साथ इस साझेदारी को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे नौसेना को त्वरित सहायता मिलेगी। मरलिनहॉक के सीईओ कार्तिक रामिनेनी ने बताया कि वर्तमान रक्षा प्लेटफॉर्म्स अत्यधिक तकनीकी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के भीतर ही तत्काल सेवा उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। रामिनेनी के अनुसार, यह कदम विदेशी निर्भरता को समाप्त करेगा और महत्वपूर्ण समय की बचत करेगा।
