बुलंद सोच, जबलपुर।

छत्तीसगढ़ जाने वाले यात्रियों के लिए रेल यात्रा इन दिनों परेशानी का कारण बनी हुई है। जबलपुर से छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के लिए प्रतिदिन चार सीधी ट्रेनें संचालित होती हैं। इनमें से जबलपुर-अंबिकापुर इंटरसिटी को छोड़कर बाकी तीन ट्रेनों की चाल लगातार बिगड़ी हुई है। सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जो सुबह रायपुर पहुंचकर दोपहर या शाम की ट्रेन से वापस लौटने की योजना बनाते हैं। ट्रेन के घंटों विलंब से पहुंचने के कारण उन्हें आगे की यात्रा टालनी पड़ रही है। रेलवे की समय-सारिणी पर निर्भर यात्रियों के लिए यह लगातार बनी अनियमितता अब एक बड़ी समस्या बन गई है।
नर्मदा एक्सप्रेस की विलंब स्थिति
बिलासपुर से जबलपुर होते हुए भोपाल जाने वाली नर्मदा एक्सप्रेस का जबलपुर पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 8.30 बजे और प्रस्थान का समय 8.40 बजे है। यह ट्रेन बिलासपुर से समय पर रवाना होने के बावजूद अनूपपुर के बाद लगातार पिछड़ती जा रही है। नौ अगस्त को यह ट्रेन करीब पौने दो घंटे, आठ अगस्त को पौने घंटे, सात अगस्त को पौने दो घंटे, छह अगस्त को पौने दो घंटे, पांच अगस्त को सवा तीन घंटे और चार अगस्त को एक घंटे की देरी से जबलपुर पहुंची।
अमरकंटक एक्सप्रेस भी अनियमित
दुर्ग से भोपाल जाने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस (12853) का जबलपुर पहुंचने का समय सुबह 4.15 बजे है। यह ट्रेन नौ अगस्त को ढाई घंटे, आठ अगस्त को एक घंटे, सात अगस्त को डेढ़ घंटे, छह अगस्त को तीन घंटे, पांच अगस्त को पौने दो घंटे और चार अगस्त को पौने दो घंटे लेट रही। वापसी में भोपाल-दुर्ग ट्रेन (12854) भी अनियमित है। नौ अगस्त को यह ट्रेन जबलपुर एक घंटे और आठ अगस्त को सवा दो घंटे की देरी से पहुंची। रायपुर में नौ अगस्त को सवा छह घंटे और तीन अगस्त को साढ़े चार घंटे की देरी दर्ज हुई।
रायपुर इंटरसिटी की वापसी में अड़चन
रायपुर-जबलपुर इंटरसिटी ट्रेन (11701) के जबलपुर पहुंचने का निर्धारित समय रात 10.45 बजे है। आठ अगस्त को यह सवा घंटे, सात अगस्त को डेढ़ घंटे, छह अगस्त को चार घंटे और पांच अगस्त को आधा घंटा लेट पहुंची। रायपुर से लौटते समय गोंदिया में इंजन बदलने के बाद इस ट्रेन की चाल प्रभावित होती है। जबलपुर पहुंचने पर कछपुरा आउटर पर भी यातायात दबाव के कारण लाइन क्लियर मिलने में समय लग जाता है।
विलंब के मुख्य कारण
नर्मदा और अमरकंटक एक्सप्रेस के विलंब के पीछे बिलासपुर रेल मंडल में चल रहे रखरखाव और अन्य अधोसंरचना कार्यों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। संबंधित रेलखंड में मालगाड़ियों का दबाव भी अधिक है। ऐसे में ट्रेन के पीछे चलने पर उसे लगातार पाथ नहीं मिल पाता और देरी बढ़ती जाती है। ट्रेन के समयपालन व्यवस्था में लंबे समय से चल रही अनिश्चितता से राहत नहीं मिलने से यात्रियों को हर दिन परेशानी से जूझना पड़ रहा है।

