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2026-07-27

दतिया संग्रहालय में मिला रानी लक्ष्मीबाई का 175 साल पुराना जीवित अवस्था का चित्र

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

दतिया के संग्रहालय में दो फीट लंबा और पौने दो फीट चौड़ा एक चित्र मिला है, जिसने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े इतिहास को जीवंत कर दिया है। यह चित्र संग्रहालय के एक कोने में रखा हुआ था।
इसे रानी लक्ष्मीबाई की जीवित अवस्था का पहला चित्र माना जा रहा है, जिसमें उन्हें घोड़े पर सवार दिखाया गया है। यह चित्र ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और संरक्षण के दौरान सामने आया है।
इस चित्र को वर्ष 1849-50 के आसपास का माना जा रहा है।

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चित्र का ऐतिहासिक संदर्भ

मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व संग्रहालय एवं अभिलेखागार के इतिहासकार डॉ. मो. वसीम खान के अनुसार, यह चित्र रानी को कुलदेवी की पूजा के लिए कड़ी सुरक्षा में जाते हुए दर्शाता है। यह उनके पति गंगाधर राव के वर्ष 1853 में निधन से पहले का समय है।
डॉ. वसीम, जिनके पूर्वज गुल मोहम्मद झांसी राज परिवार के सुरक्षा प्रमुख थे, बताते हैं कि रानी बहुत विशेष लोगों से ही मिलती थीं, इसी कारण उनके चित्र बहुत कम मिलते हैं।
गंगाधर राव के समय चित्रकारों को अच्छा संरक्षण प्राप्त था, जबकि अन्य तत्कालीन रियासतों में ऐसा नहीं था। उनके मुख्य चित्रकार सुखलाल थे, जिन्होंने राजपरिवार और लोकजीवन से जुड़े कई चित्र बनाए थे।
इस बात की प्रबल संभावना है कि यह रंगीन चित्र भी सुखलाल ने ही बनाया होगा, जिसमें सोने के कणों का उपयोग किया गया है, हालांकि इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है।

संग्रहालय में चित्र का आगमन

अभी परिवार के लोगों के पास एक ही चित्र है। यह चित्र 18 जून, 1858 को अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी के वीरगति को प्राप्त होने के बाद नजदीकी दतिया रियासत की तरफ से भेजे गए कर्मचारियों ने उनके महल से लाकर रखा था।
रियासतों का विलय होने के बाद, यह चित्र पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखा गया था।

अन्य चित्रों से समानता और संरक्षण

डॉ. वसीम बताते हैं कि अभी रानी का एक ही चित्र (ब्लैक एंड व्हाइट) पुस्तकों और इंटरनेट मीडिया में मिलता है जो रानी के वीरगति को प्राप्त होने के बाद उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव ने बनवाया था।
इस प्रचलित चित्र और अभी मिली पेंटिंग में कई समानताएं हैं, जिसके आधार पर यह भी माना जा रहा है कि इसे भी उनके किसी करीबी व्यक्ति ने बनाया होगा।
पुरातत्व विभाग के आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संग्रहण और संरक्षण के दौरान दतिया संग्रहालय से उनकी टीम को यह दुर्लभ चित्र मिला है, जिसे संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सर्वाधिक पांडुलिपियों के संग्रहण में मध्य प्रदेश शीर्ष पर है।
झांसी की रानी के वंशज योगेश राव नेवालकर (नागपुर) के अनुसार, रानी का अभी तक विश्व में केवल एक ही प्रमाणित चित्र मौजूद है, जो उनके परिवार के पास सुरक्षित है। इसे उनके पुत्र द्वारा स्मरण में मौजूद रानी की छवि के आधार पर इंदौर के एक चित्रकार द्वारा बनवाया गया था।
दतिया से प्राप्त यह पेंटिंग प्रचलित चित्र से बहुत समानता रखती है और इसका संरक्षण आवश्यक है, क्योंकि यह एक बहुमूल्य धरोहर है।