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डिंडौरी जिला अस्पताल में नाबालिग को जहर के बाद मिनरल वाटर की ड्रिप, वीडियो वायरल

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, डिंडौरी।

आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले के जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां इमरजेंसी वार्ड में जहर खाने वाले एक नाबालिग मरीज के पेट में गैस्ट्रिक ट्यूब के जरिए बाजार में बिकने वाले सामान्य मिनरल वाटर की बोतल से ड्रिप चढ़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

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वीडियो सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने चूक स्वीकार करते हुए जांच की बात कही है। वहीं कलेक्टर अंजू पवन भदोरिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह मामला डिंडौरी के सिविल लाइन क्षेत्र के निवासी नाबालिग युवक सत्यम से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, अज्ञात कारणों के चलते उसने चूहे मारने वाली जहरीली दवा खा ली थी।

हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान मेडिकल प्रोटोकॉल की खुलेआम अनदेखी की गई।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ड्रिप स्टैंड पर जीवनरक्षक दवा या मेडिकल सलाइन की जगह मिनरल वाटर की बोतल टंगी है। इसी बोतल से नाबालिग के पेट में गैस्ट्रिक ट्यूब के माध्यम से पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन इलाज की इस खतरनाक और गैर-वैज्ञानिक पद्धति का वीडियो सामने आने के बाद पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नाराजगी है।

मामला तूल पकड़ने के बाद डिंडौरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज पांडे ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि मरीज का पेट साफ करने के लिए सामान्य पानी का उपयोग किया गया था और यह मेडिकल नियमों के अनुसार नहीं है।

डॉ. पांडे ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है। यदि किसी डॉक्टर या स्टाफ की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों में इलाज के मानक तय हैं और उनका पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने भी मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि मरीज के जीवन से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कलेक्टर भदौरिया ने बताया कि यदि इलाज मेडिकल नॉर्म्स के अनुसार नहीं किया गया है तो जांच के बाद जिम्मेदारी तय कर संबंधितों पर सख्त कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जहर खाने के मामलों में पेट साफ करने के लिए मेडिकल ग्रेड का नॉर्मल सलाइन या विशेष घोल का ही उपयोग किया जाता है। मिनरल वाटर में मौजूद मिनरल्स और बैक्टीरिया मरीज के लिए और खतरनाक साबित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे में अस्पताल स्टाफ की यह लापरवाही सीधे मरीज की जान को जोखिम में डालने वाली है। फिलहाल जिला अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

इस घटना के बाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।